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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर आयुषी तिवारी की कविता, ‘आत्महत्या-मत करना अपनी हत्या’
September 10, 2020 • जनसंदेश न्यूज • मनोरंजन/लाइफस्टाइल



वाराणसी। बीते दिनों बॉलीवुड के प्रतिभाशाली एक्टर सुशांत सिंह के आत्महत्या ने ना सिर्फ पूरे देश को झकरोर दिया, बल्कि उनके इस कदम ने हर किसी को आश्चर्य चकित कर दिया। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर मुंबई के मायानगरी में एक अलग पहचान बनाने वाले सुशांत सिंह राजपूत हर उस युवाओं के आइकॉन थे, जो छोटे शहर से होने के बावजूद बड़े सपने देखता है और उसे पूरा करने की सोचता है। लेकिन जिस तरह से वें दुनिया से रूखसत हुए, वह हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कौन सा वह कारण था, जिससे सुशांत ने इतना बड़ा कदम उठा लिया। 

बहरहाल उनकी मौत को लेकर तमाम विवाद भी है, लेकिन मनोवैज्ञानिक से लेकर हर कोई इस तरह की कदम को डिप्रेशन का शिकार होना मानते है। आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day) पर हमें नकारात्मक से निकलकर सकारात्मकता की तरफ आगे बढ़ना है और तमाम परेशानियों और कठिनाईयों को दरकिनार कर जीवन में सफलता के नये आयाम गढ़ना है। 

प्रस्तुत है महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी की शिक्षार्थी आयुषी तिवारी की एक कविता

आत्महत्या-मत करना अपनी हत्या

मत बनना स्वयं को मारने का कारण, हारना नहीं तुम जिंदगी से।

लड़ना मुश्किलों से तुम, निकालना खुद को विपत्तियों से।

हर सुख-दुःख से अनुभव लेना, जीवन पथ पर चलते रहना।

मत बनना स्वयं को मारने का कारण, हारना नहीं तुम जिंदगी से।।

अपनों का ख्याल करना, आएं बुरे विचार तो उस पर प्रहार करना।

मारना अंदर के हर दुर्गुणों को, छूना तुम आसमान के बुलंदियों को। 

खुद को मारकर कारण मत कहलाना, मिलीं है जो जिंदगी तो इसे यूं ही क्यूं गंवाना।

मत बनना स्वयं को मारने का कारण, हारना नहीं तुम जिंदगी से।।

मार सको तो मारों अपने गलत इरादों को, दूसरे से द्वेष की भावनाओं को।

मारो अपनी कायरता को, मारो अपनी दरिद्रता को।

अगर मार सको तो मारों समाज की बुराईयों को।

मार सको तो मारों हर गलत धारणाओं को।

लेकिन खुद को मारकर एक कमजोर की परिभाषा ना बन जाना।

मत बनना स्वयं को मारने का कारण, हारना नहीं तुम जिंदगी से।।