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वैज्ञानिकों का दावा आगामी सूर्य ग्रहण के बाद अपने आप समाप्त हो जायेगा कोरोना वायरस, बताया ग्रहण और वायरस के बीच का कनेक्शन
June 15, 2020 • जनसंदेश न्यूज • करोना वायरस


जनसंदेश न्यूज़
चेन्नई। पूरे विश्व में उथल पुथल मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर वैज्ञानिकों ने एक बेहद ही रोचक और खुश होने वाला दावा किया है। वैज्ञानिकों ने इस दावे के पीछे वैज्ञानिक कारण भी बताया है। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच चेन्नई के वैज्ञानिक ने दावा किया है आने वाले 21 जून को लगने वाले सूर्य ग्रहण के बाद कोरोना वायरस अपने आप समाप्त हो जायेगा। वैज्ञानिक ने सूर्यग्रहण और कोरोना वायरस के बीच कनेक्शन का दावा किया है। 
न्यूक्लियर और अर्थ साइंटिस्ट डॉ. केएल सुंदर कृष्णा का कहना है कि सूर्यग्रहण के बाद उत्सर्जित विखंडन ऊर्जा के कारण पहले न्यूट्रॉन के कण के संपर्क के बाद कोरोना वायरस टूट गया है। बताया कि 26 दिसंबर 2019 को आखिरी सूर्य ग्रहण लगने के बाद कोरोना वायरस हमारे जीवन को नष्ट करने के लिए आया है। 
डॉ. कृष्णा के मुताबिक, ग्रहों के बीच ऊर्जा में बदलाव के कारण यह वायरस ऊपरी वायुमंडल से उत्पन्न हुआ है। इसी बदलाव के कारण धरती पर उचित वातावरण बना। ये न्यूट्रॉन सूर्य की सबसे अधिक विखंडन ऊर्जा से निकल रहे हैं। न्यूक्लियर फॉर्मेशन की यह प्रक्रिया बाहरी मटेरियल के कारण शुरू हुई होगी, जो ऊपरी वायुमंडल में बायो मॉलिक्यूल और बायो न्यूक्लियर के संपर्क में आने से हो सकता है। बायो मॉलिक्यूल संरचना (प्रोटीन) का म्यूटेशन इस वायरस का एक संभावित स्रोत हो सकता है।
सूर्य की किरणों से खत्म होगा कोरोना
डॉ. केएल सुंदर कृष्णा के अनुसार, म्यूटेशन प्रॉसेस सबसे पहले चीन में शुरू हुआ होगा। हालांकि, इस दावे का कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह एक प्रयोग या जानबूझकर किए गया प्रयास भी हो सकता है। आगामी सूर्यग्रहण कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सूर्य की किरणों की तीव्रता वायरस को निष्क्रिय कर देगी। उन्होंने कहा कि हमें इससे घबराने की जरूरत नहीं है। यह सौरमंडल में होने वाली प्राकृतिक हलचल है। सूर्य की किरणें और सूर्य ग्रहण इस वायरस का प्राकृतिक इलाज है।