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सोनभद्र में निर्माणाधीन रेलवे पुल की शटरिंग ढही, एक मजदूर की मौत, दो जख्मी, कुछ ही मिनट पहले हुआ था लंच
July 18, 2020 • शशिकांत चौबे • मीरजापुर-सोनभद्र-भदोही

मुआवजे के आश्वासन पर शव उठाने को राजी हुए मृतक के परिजन

जनसंदेश न्यूज
ओबरा/सोनभद्र। स्थानीय थाना क्षेत्र अंतर्गत रेणुका पार के कड़िया गांव के समीप निर्माणाधीन रेलवे पुल की शटरिंग गिर जाने से उसमें दबकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गयी जबकि दो अन्य घायल हो गए। घायलों का उपचार सरकारी अस्पताल में कराया जा रहा है। श्रमिक की मौत के बाद उसके परिजनों ने मुआवजे की मांग करते हुए शव ले जाने से मना कर दिया। हालांकि ठेकेदार द्वारा मुआवजा देने के आश्वासन पर वें मान गए। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। 
फफरा कुंड से ओबरा डैम के बीच रेलवे विभाग द्वारा रेल ट्रैक के दोहरीकरण का कार्य कराया जा रहा है। शनिवार की दोपहर लगभग साढ़े बारह बजे के करीब ब्रिज नंबर 12 की पूरी शटरिंग भरभरा कर नीचे गिर गई। जिससे उसमें दबकर 22 वर्षीय राजू पुत्र अमृतलाल निवासी ग्राम अरंगी टोला बहेरा की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं 19 वर्षीय विजय पुत्र दद्दन तथा 20 वर्षीय सुरेंद्र पुत्र लाल साहब निवासी अरंगी गंभीर रूप से घायल हो गए। 


सूचना पाकर मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर यमुनानगर चैहान, क्षेत्राधिकारी भास्कर वर्मा तथा प्रभारी निरीक्षक शैलेश राय, चोपन थाना प्रभारी नवीन तिवारी, डाला चैकी इंचार्ज चंद्रभान सिंह द्वारा मजदूरों तथा एक पोकलेन मशीन की मदद से शटरिंग हटवा कर घायलों को बाहर निकलवा कर इलाज हेतु भेजवा दिया। 
ग्रामीणों की माने तो उक्त स्थान पर एक दर्जन से ज्यादा मजदूर कार्य कर रहे थे। संयोग अच्छा था कि लंच का टाइम होने के चलते महज 20 मिनट पहले वहां से कई मजदूर भोजन करने हेतु निकल चुके थे। अन्यथा किसी बहुत बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता था। दूसरी ओर ग्रामीण मृतक का शव रखकर मुआवजे की मांग करने के साथ आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा मजदूरों को किसी तरह का सुरक्षा उपकरण नहीं दिया गया था। 
बता दें कि रेलवे विभाग द्वारा पुल निर्माण का कार्य एचएसीएल नामक कंपनी को दिया गया था। बाद में उक्त कंपनी द्वारा यह कार्य केएनआई कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी को पेटी पर दे दिया गया था। घटना होते ही मौके से कार्यदाई संस्था के लोग फरार हो गए थे। बवाल बढ़ने की सूचना मिलते ही एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह तथा अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय ओपी सिंह द्वारा घटनास्थल पर पहुंच गए। ठेकेदार द्वारा चार लाख रुपया मुआवजा देने का आश्वासन देने के बाद  ग्रामीण शव को उठाने पर राजी हो गए।