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सरकारी गेहूं क्रय केंद्राेें पर टार्गेट फुस्स, बढ़ाई तिथि, - फूले हाथ-पांव, अब 30 जून तक जारी रहेगी यह खरीद
June 20, 2020 • सुरोजीत चैटर्जी • वाराणसी-चंदौली

- किसानों की अरुचि के कारण हासिल नहीं कर सके लक्ष्य

- अधिकांश अन्नदाताओं ने सिरे से नकारा है समर्थन मूल्य

- सहकारी समितियों पर कुल जमा 288 किसान ही पहुंचे

सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। शासन स्तर से तय मियाद बीतने के बावजूद सरकारी गेहूं क्रय केंद्र निर्धारित लक्ष्य हासिल नहीं कर सके हैं। करीब एक माह तक गेहूं खरीदने के लिए चली कवायद और दौड़धूप का आलम यह है कि अबतक जनपद के 34 क्रय केंद्रों ने कुल टार्गेट का महज 15.31 फीसदी ही खरीद की है। इनमें खाद्य विभाग, एफपीओ, पीसीएफ, यूपी एग्रो और एनसीसीएफ के क्रय केंद्र शामिल हैं। वहीं, साधन सहकारी समितियों के 17 क्रय केंद्र पर कुल जमा 288 किसान ही अपनी उपज लेकर पहुंचे।

गेहूं खरीद की बेहद खराब स्थिति और सरकारी समर्थन मूल्य को नकारते हुए क्रय केंद्रों के प्रति किसानों की अरुचि से घबराए शासन के हाथ-पांव फूल गये हैं। सो, अब गेहूं खरीद की अवधि बढ़ाई गयी है। सरकारी क्रय केंद्रों पर 30 जून तक गेहूं की खरीद जारी रहेगी। अब बारिश के कारण संकट और बढ़ गया है। जिले में सहकारी साधन समितियों के क्रय केंद्रों पर इस बार गेहूं खरीद का कुल लक्ष्य 6200 एमटी है। उसके सापेक्ष अबतक 897.614 एमटी खरीद ही हो सकी है।

इन क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने वाले कुल 288 किसानों को एक करोड़ 32 लाख 49 हजार रुपये का भुगतान किया गया। जबकि 40.30 लाख रुपये बकाया चल रहा है। अब समितियों पर पहुंचे किसानों की स्थिति देखिए। मिल्कीचक स्थित क्रय केंद्र पर सिर्फ तीन किसानों ने अपना गेहूं बेचा। कनियर स्थित सेंटर पर महज छह किसान पहुंचे। चौबेपुर स्थित क्रय केंद्र पर चार किसानों ने अपना उपज सौंपा। सर्वाधिक 32 किसानों ने फूलपुर स्थित क्रय केंद्र गेहूं बेचा। जक्खिनी और मिर्जामुराद सेंटर पर 30-30 किसानों से गेहूं की खरीद हुई।

इसी प्रकार छाहीं गोपपुर क्रय केंद्र पर में 14, मरुई छतांव में 16, बाबतपुर सेंटर पर 14, बेलवा में 26, नरायनपुर में 11, चोलापुर में 32, गोसाईंपुर मोहांव में महज आठ, अजगरा में 14, अनेई में 17, आयर में 18 और गोसाईंपुर नंबर-2 क्रय केंद्र पर 13 अन्नदाताओं से गेहूं खरीदा गया। इन सभी समितियों में से प्रत्येक को 364 एमटी खरीद का लक्ष्य मिला है लेकिन टार्गेट की तुलना में सबसे ज्यादा 115.35 एमटी खरीद सिर्फ फूलपुर सेंटर पर ही हो सकी। उसके बाद बेलवा क्रय केंद्र पर 96.75 एमटी गेहूं बेचा गया है। अन्य समितियों की हालत इनकी तुलना में और भी खराब है।

अब समितियों पर बकाए भुगतान पर नजर डालें तो अनेई, चौबेपुर तथा मिल्कीचक में किसी प्रकार का बकाया न होने का दावा है। जबकि किसानों का चार लाख रुपये से अधिक का सर्वाधिक बकाया तीन केंद्रों पर चल रहा है। उनमें से फूलपुर सेंटर पर 4.60 लाख रुपये, बेलवा में 6.69 लाख रुपये और मिर्जामुराद क्रय केंद्र पर 6.24 लाख रुपये का पेमेंट लंबित है। सहायक निबंधक सहकारिता विनोद सिंह के मुताबिक गोसाईंपुर मोहांव, चौबेपुर और नरायनपुर को छोड़कर अन्य समितियों पर बीते शुक्रवार तक 218.164 एमटी गेहूं पड़ा हुआ है।

दूसरी ओर, जिला विपणन अधिकारी अरुण कुमार त्रिपाठी के मुताबिक कुल 35 पर गेहूं खरीद का लक्ष्य 15 हजार एमटी है, जिसमें से शनिवार तक 34 केंद्रों पर सिर्फ 615 किसानों से कुल 2294.614 एमटी खरीद ही हो सकी है। जबकि गत वर्ष इसी अवधि में किसानों ने 11399.99 एमटी गेहूं बेचा था। इस साल अबतक हुई खरीद के एवज में अन्नदाताओं को कुल मिलाकर तीन करोड़ 62 लाख 54 हजार रुपये का पेमेंट हो चुका है और 79.55 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। दोनों अफसरों ने बताया कि बीते 15 जून तक लक्ष्य हासिल न होने के कारण गेहूं खरीद की अवधि 30 जून तक बढ़ायी गयी है।

दस दिन के खरीद ठप

पिंडरा। स्थानीय विकास खंड के फूलपुर स्थित साधन सहकारी समिति के गेंहू क्रय प्रभारी इंदु प्रताप सिंह ने स्वीकार किया कि किसान अपनी उपज हमें बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। बीते दस दिन से यहां खरीद लगभग बंद है। दूसरी ओर, किसानों ने बताया कि सरकारी सेंटर पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान लेने के लिए चक्कर कौन लगाए। सरकारी रेट या उससे ज्यादा दर पर व्यापारी नकद पैसा देकर हमारे घर से ही गेहूं उठा रहे हैं।

पचड़े में क्यों पड़ें

दानगंज। चोलापुर क्षेत्र स्थित क्रय केंद्र प्रभारी जितेंद्र यादव के मुताबिक अबतक 32 किसानों से 830 कुं. गेहूं खरीदा गया है। अजगरा सेंटर इंचार्ज दिनेश बहादुर सिंह के अनुसार 14 किसान से 397.50 किलो खरीद हो सकी है। अब यहां किसान नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर, हरिशंकर सिंह, चंद्रशेखर सिंह, रामअवतार यादव, रामधनी यादव ने सरकारी समर्थन मूल्य पर सवाल खड़े किये। सरकार क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने में पल्लेदारी और वाहन किराया भी देना पड़ता है। ऐसे पचड़े में हम क्यों पड़ें। आगे चलकर भाव बढ़ने पर हमें मुनाफा होगा।