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रविवार को लगने वाले सूर्यग्रहण का देश पर क्या पड़ेगा प्रभाव, इन राशियों के लिए लाभदायक
June 19, 2020 • जनसंदेश न्यूज • जनसंदेश एक्सक्लूसिव

ज्योतिषाचार्य पं. विशाल ने बताई सूर्यग्रहण की खास बातें


जनसंदेश न्यूज़
वाराणसी। रविवार 21 जून को लगने वाला सूर्यग्रहण कई मायनों में खास है। यह सूर्यग्रहण कंकणा कृति सूर्यग्रहण है। इस सूर्यग्रहण का प्रभाव समस्त भारत और दक्षिणी पूर्वी यूरोप ऑस्ट्रेलिया के केवल उतरी क्षेत्रों प्रशान्त एवं हिन्द्र महासागर मध्य पूर्वी एशिया पाकिस्तान, चीन, बर्मा, फिलीपीन्स में दिखाई देगा। जिसका सुतक 12 घण्टें पूर्व लग जायेगा। ऐसे तो आकाशीय घटना ग्रह के अनुसार बराबर होता रहता है। लेकिन जिसका प्रभाव धरातल-मानव से जुड़ा हैं। ज्योतिषचार्य पं.विशाल पोरवाल ने सूर्य ग्रहण के प्रभाव व उसके निवारण को लेकर कई बातें बताया, साथ ही यह भी बताया कि इस सूर्य ग्रहण का देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा। 
5 घंटा 48 मिनट तक रहेगा सूर्यग्रहण
पंडित विशाल पोरवाल ने बताया कि सूर्य ग्रहण आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस्या दिन रविवार मृगशिरा आर्द्रा नक्षत्र में मिथुन राशि पर घटित हो रहा है। जो सुबह 09 बजकर 16 मिनट से मध्यदिन 12 बजकर 10 मिनट तथा मोक्ष 03 बजकर 04 मिनट तक लगभग 5 घंटा 48 मिनट तक रहेगा जिसमें चार ग्रह का योग मिथुन राशि पर है। भारत की कुंडली में भी यह संयोग ठीक नहीं है। राजनीतिक में तनाव, व्यपार में नुकसान कोरोना महामारी से त्रस्त देश राज्य-सरकार की स्थिति भयावह रहेगी। बुध-गुरु-शुक्र-शनि वक्री होने से भी भूकंप की स्थिति का सामना करना पड़ेगा। धर्म-क्षेत्र मिडिया, फिल्म-जगत् में भी तनाव का महौल रहेगा।
मेष, सिंह, कन्या, मकर के लिए लाभदायक
ज्योतिषाचार्य के अनुसार 29 सितम्बर 2020 के बाद शांति एवं वैश्विक महामारी से मुक्ति, दवाई मिलने का योग बनेगा। विश्व में कही अनहोनी का भी योग वर्तमान में बन रहा है। मंगल के नक्षत्र में होने से जमीन-आग पंट्रोलियम खनिज पदार्थ में नुकसान रहेगा, लेकिन मेष-सिंह, कन्या-मकर राशि वालों के लिए लाभदायक रहेगा तथा शेष राशियों के लिए ठीक नहीं है। वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृच्शिक, धनु, कुंभ राशि वाले तनाव एवं नुकसान में रहेंगे। इस ग्रहण के पूर्व ही संपूर्ण जगत त्रस्त रहेगा। यह योग अचानक सृष्टि क्रम के अनुसार फल देगा। 
अन्न पदार्थ में रखे कुशा-तुलसी
पंडित विशाल ने कहा कि सनातन परम्परा में धर्म ज्योतिष वेद का नेत्र है। जिससे देखकर हम गणना करते है। ग्रहण काल में सूर्य उपासना आदित्य हृदय स्त्रोत, इष्ट मंत्र जाप  शिव-दुर्गा-विष्णु स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। नग्न आँखों से ग्रहण को ना देखें। ग्रहण काल के समय पका हुआ अन्न अशुद्ध हो जाता है। अन्न पदार्थ में कुशा-तुलसी रखें। बच्चें, गर्भवती-स्त्री, बुजुर्ग को सुतक दोष लगेगा है। चार ग्रह एक साथ होने से राजनीतिक तथा प्राकृतिक प्रकोप से व्यापार तथा जन-धन हानि होने का योग है। 
मां दुर्गा की करें अराधना
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ग्रहण समाप्ति काल के बाद गंगा स्नान, ध्यान तीर्थ स्नान अन्न-जल, दान छाया पात्र काला तील, तेल का दान करना श्रेष्ठ होता है। मिथुन राशि के प्रधान नेता पाकिस्तान मुस्लिम देशों के केन्द्रीय सत्ता में परिवर्तन, यमुना निकट क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण समय रहेगा। प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन, की हानि है। ग्रहण के बाद भी कुछ समय तक दूरभिक्ष अकाल जन्म स्थिति रहेगी। जिसका प्रभाव मिथुन संक्रन्ति तक रहेगा। वैश्विक महामारी से धन क्षय होगा। इस समय महामाई दुर्गा का ध्यान पूजन करना श्रेष्ठ होगा। वर्ष के अंत तक सब कुछ सामान्य होने की सम्भावना है।