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रक्त में हमारे उबाल आना बाकी है........अंकिता भारती की कविताएं.....
June 18, 2020 • जनसंदेश न्यूज • मनोरंजन/लाइफस्टाइल
एक जिद हूँ मैं..
 
एक जिद हूँ मैं..
नकार दी जाऊंगी,
एक खयाल हूँ मैं..
अंत में..खारिज ही की जाऊंगी,
 
एक किस्सा हूँ मैं..
भुला दी जाऊंगी,
एक लौ हूँ मैं..
सहर होते ही..बुझा दी जाऊंगी,
 
एक टूटी हुई आस हूँ मैं,
मिटा दी जाऊंगी,
अधूरा सा प्यार हूँ मैं,
यकीनन ठुकरा दी जाऊंगी,
 
एक अहसास हूँ मैं,
जला दी जाऊंगी,
एक दर्द हूँ मैं,
दिल मे ही..छुपा ली जाऊंगी,
 
अधूरी अल्फाज़ हूँ..
अनकही जज़्बात हूँ..
आखिर में..हमेशा के लिये..
खामोश कर दी जाऊंगी.....।।
 
साजिशों का दौर यूं ही चलता रहा
 
साजिशों का दौर यूं ही चलता रहा
जनाजा बेकसूरों का निकलता रहा
 
हम यहां तुष्टिकरण से तुष्ट होते रहे
दुश्मन साजिशों से हमें छलता रहा
 
खून गर्म है मेरा अब हवा न कीजिए
हाथ बांधते हो मेरे दिल जलता रहा
 
देश के लिए मेरी जान हमेशा रहेगी
पर तुम्हारे आदेश के लिए मरता रहा
 
इंतजार करता हूं जुल्मों को हद तक
किस सजा के लिए मैं पिसता रहा
 
तुमको कसम है मेरी हर शहादत की 
मैं मरा और दुश्मन क्यों बचता रहा
 
एक बार हमको हम पर छोड़ दीजिए
तौबा करेगा जो साजिशें रचता रहा
 
 
रक्त में हमारे उबाल आना बाकी है
 
रक्त में हमारे उबाल आना बाकी है
चीन तुझे तेरी औकात दिखाना बाकी है
 
तूने मानवता के खिलाफ जो साजिश की है
मानवता का तुझसे हिसाब लेना बाकी है
 
नहीं टिक पाया अधर्म कर इस धरा पर कोई
तू है एक ज़र्रा बस मिट जाना तेरा बाकी है
 
कोरोना वायरस बना तूने इन्सानियत का है गला घोंटा 
सीमा पर हमारी जमीन हड़प अपराध तेरा बाकी है 
 
मत समझ सिर्फ हिंद सेना ही सिखाएगी सबक तुझे
हिंद की जनता का मुंहतोड़ जवाब देना बाकी है
 
सीमा पर हिंद सेना करेगी भीषण संहार तेरा
तेरे सामान का बहिष्कार कर जनता का तेरा कमर तोड़ना बाकी है
 
गये वो जमाने जब तूने बरगलाया था नेहरू को
अब यहां मोदी हैं तेरा पार पाना बाकी है
 
पाप का घड़ा भरा तेरा ड्रैगन को अपनी संभाल अब 
शेर की दहाड़ और तेरे चिथड़े उड़ाना बाकी है
 
दम्भी कपटी समस्त मानवता का दुश्मन तू साबित हुआ
विश्वामित्र विश्वगुरु भारत का तुझे पाठ पढ़ाना बाकी है
 
हिंदी चीनी भाई भाई का भूल जा नारा पुराना 
हिंदी चीनी बाय बाय का नारा लगाना बाकी है
 
 
अंकिता भारती
शिक्षार्थी, महात्‍मा गांधी काशी विद्यापीठ