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रक्षामंत्री की पहल पर मौत के ढ़ाई महीने बाद दक्षिण अफ्रीका से शहाबगंज के इस गांव पहुंचा युवक का शव, मचा कोहराम
June 22, 2020 • इबरार अली • वाराणसी-चंदौली

दक्षिण अफ्रीका में सर पर पोल गिर जाने से हो गयी थी मौत

उपजिलाधिकारी गांव पहुंच कर परिजनों को दी सांत्वना

जनसंदेश न्यूज़
शहाबगंज/चंदौली। विदेश कमाने गए युवक महातिम विश्वकर्मा (36) का शव सोमवार को सुबह 10 के करीब बड़गावां गांव में आते ही कोहराम मच गया। माता कलावती देवी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रही थी तो पत्नी अंजना देवी शव (ताबूत) से लिपट कर रोते-रोते मूर्छित हो गयी। भाई रामभरोष, नवमी विश्वकर्मा व बहन इन्दा देवी, चन्दा देवी, शकुंतला देवी दहाड़े मार कर रो रही थी। उनका विलाप देख कलेजा मुंह को आ रहा था। पिता राममूरत विश्वकर्मा बेसुध पड़े थे, तो मृतक के 6 वर्षीय पुत्र आयुष व पुत्री गरिमा 3 वर्ष घटना से अनभिज्ञ लोगों को एकटक निहार रहे थे। 
मृतक के बड़े भाई व इंटर कॉलेज के प्रवक्ता रामभरोष विश्वकर्मा ने बताया कि 36 वर्षीय महातिम दक्षिण अफ्रीका में अल्फा सेन्चुरी माइनिंग कम्पनी में काम करता था 2 अप्रैल को रात्रि 11 बजे के करीब फोन कर हमें बताया गया कि महातिम की एक दुर्घटना में मौत हो गयी है। इतना कहते-कहते रामभरोष फफक कर रोने लगे। तभी से पूरा परिवार गम में डूबा है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण शव नहीं आ पा रहा था तो इसकी सूचना केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को उनके परिवार वालों के माध्यम से उनके गांव भभौरा जाकर लिखित रूप से दी गई। जहां से शव घर आने में पूरी मदद मिली। लगभग ढाई महीने बाद जब शव गांव आया तो सब्र टूट गया और परिजन विलाप करने लगे। 


अंत्येष्टि की व्यवस्था में लगे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गुलफाम अहमद उर्फ मिक्कू, इबरार अली ने बताया कि महातिम बड़ा ही मिलनसार था। उसकी असमय मौत से पूरा गांव गमगीन है। शव जैसे ही बाबतपुर से एम्बुलेंस द्वारा गांव पहुंचा तो गांव के बाहर एम्बुलेंस को रूकवाकर प्रधान ने गाड़ी को सेनेटाइज करवाया, तब शव को घर ले जाया गया। उपजिलाधिकारी शिपू गिरी भी मौके पर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। 
इस दौरान जिला पंचायत सदस्य सूर्यमुनी तिवारी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रतीश कुमार, सुभाष विश्वकर्मा, त्रिलोकी लेखपाल, तौफीक लेखपाल, फौजी अरशद, इरफान, दशमी मौर्या, अनीश खां, राजेन्द्र मौर्य, अंजूम लड्डू, नौरंग विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, अजय विश्वकर्मा आदि गांव के लोग मौजूद थे।