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राहत कोष के पैसे में हेराफेरी के आरोपी एडीओ पंचायत का तबादला, नहीं मिला कोई चार्ज, जांच लंबित, संशय बरकरार
June 26, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू • इलाहाबाद


भाजपा मंडल अध्यक्ष ने लगाया था राहत कोष में घोटाले का आरोप

जनसंदेश न्यूज 
गाजीपुर। विवादित एडीओ पंचायत कासिमाबाद का सीडीओ के आदेश पर तबादला हो गया है। फिलहाल डीपीआरओ ने उन्हें किसी जगह चार्ज नहीं दिया है। लेकिन उनके खिलाफ जांच की फाइल एसडीएम के यहां अभी भी लंबित है। इस मामले को लेकर विभाग सहित आम लोगों में संशय बना हुआ है।
बतादें, कोरोना महामारी में सफाईकर्मियों एवं ग्राम प्रधानों द्वारा जमा राहत कोष में हेरा-फेरी को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष ने विगत दिनों आरोप लगाया था। मंडल अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने सीडीओं एवं एसडीएम रमेश मौर्या तथा सीएम पोर्टल पर लिखित शिकायत किया था। सीडीओ श्री प्रकाश गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एसडीएम को सौंप दिया। जांच काफी दिनों बाद भी एडीओ पंचायत का नहीं हुआ। लेकिन शुक्रवार को सीडीओ के आदेश पर डीपीआरओ ने तबादला कर दिया। इनके स्थान पर भांवरकोल एडीओ पंचायत दुर्गेश यादव को चार्ज दिया गया है।
इस मामले में डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह का कहना है कि पूर्व के मामले को संज्ञान में लेते हुए तबादला कर दिया गया है। जांच के नाम पर कुछ भी बताने से बचते रहें। आपको बता दें कि, इस पूरे प्रकरण को जनसंदेश टाइम्स ने प्रमुखता से उठाया था। 
दरअसल, एडीओ पंचायत अशोक कुमार यादव हमेशा विवादो में रहें है। जहां भी यह पंचायत के पद पर चार्ज लिए है वहां कर्मचारियों ने विरोध जताया है। अशोक यादव रेवतीपुर, सदर तथा देवकली में भी इसके पहले एडीओ पंचायत रह चुके है। इधर उनकी तैनाती को लेकर भी सवाल उठते रहें है। कारण किसी ब्लाक पर एडीओ पंचायत के पद पर रहते हुए इन्होंने सचिव का चार्ज नहीं लिया था। जबकि उनका मूल पद सचिव का ही है। 
बताया जाता है कि अधिकारियों एव राजनीतिक पकड़ के चलते यह नियम को ताक पर रखकर एडीओ पंचायत की कुर्सी हथियाने में सफल हो जाते है। हालांकि कासिमाबाद विकास खंड में सफाईकर्मियों का मामला तुल पकड़ रहा है। आरोप था कि ब्लाक में तैनात सफाईकर्मी एक हजार एवं ग्राम प्रधान तैतीस सौ रूपया मुख्यमंत्री राहत कोष में नगद सहायक विकास अधिकारी पंचायत अशोक यादव के पास जमा किए। 231 सफाईकर्मी दो लाख 31 हजार एवं 99 ग्राम पंचायतों के कुल 99 ग्राम प्रधानों से तीन लाख 46 हजार पांच सौ रुपए की धनराशि वसूल की गई। लेकिन धनराशि में आधे से भी अधिक धनराशि सीएम राहत कोष में भेजी नहीं गई। जिसकी जांच की फाइल एसडीएम रमेश मौर्या के यहां लंबित है।