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पूर्वांचल के इस जिले में एक साथ 20 पुलिसकर्मी हुए लाइन हाजिर, मचा हड़कंप, जानिए क्या है मामला?
June 23, 2020 • महर्षि सेठ • जौनपुर-गाजीपुर


आये दिन तबादलों के बावजूद अपराधों में कमी नहीं

जनसंदेश न्यूज़
जौनपुर। पुलिस अधीक्षक द्वारा पुलिस महकमें में ताबड़तोड़ तबादला और लाइन हाजिर की कार्यवाही किए जाने से पुलिस प्रशासन में खलबली मच गयी है। मंगलवार को भी पुलिस अधीक्षक ने पांच उपनिरीक्षक को लाइन हाजिर कर दिया। इनमें कोतवाली केराकत के सरायबीरू चाकी प्रभारी अजय शर्मा, थानागद्दी चौकी प्रभारी श्रीप्रकाश राय तथा मुफ्तीगंज चौकी प्रभारी कमलेश कुमार शामिल हैं। इसके अलावा जलालपुर थाने पर तैनात उपनिरीक्षक अखिलेश यादव तथा पुलिस चौकी पराऊ गंज के प्रभारी उपनिरीक्षक युगल किशोर भी पुलिस अधीक्षक की कार्यवाही की चपेट में आये हैं। 
इन पर आरोप है कि ये लोग सूचना के बावजूद चेकिंग प्वाइंटर पर मौजूद नहीं थे। इस तरह से इन लोगों ने कर्तव्य पालन में लापरवाही की। इसके अलावा 15 आरक्षियों को भी पुलिस अधीक्षक ने लाइन हाजिर किया। इनमें खेतासराय थाना के मेराज खां, खुटहन के गोपाल सोनकर, सिकरारा के रमेश यादव, मीरगंज के अरूण कुमार गौड़, केराकत के सुदिष्ट नारायण सिंह, जलालपुर के पवन सिंह, गौराबादशाहपुर के काशीनाथ यादव, बरठसी के रामसुमेर यादव, नेवढ़िया के सुहेल अहमद, शाहगंज के सूरज सोनकर तथा मोहम्मद अतीक, मछल्लीशहर के कालिका यादव, मीरगंज के अरविंद सिंह, जलालपुर, लाइन बाजार के उदय दूबे तथा जलालपुर के प्रद्युम्न सम्मिलित है। 
उल्लेखनीय है कि पिछले एक माह के अंदर स्थानान्तरण, और लाइन हाजिर की कार्यवाही बड़े पैमाने पर होने से पुलिस विभाग के लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानान्तरण और लाइन हाजिर की कार्यवाही के बावजूद अपराधों में कमी न आने के कारण पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे है। आम जनता तो इसकी भुक्तभोगी है। यह धारणा लोगों में घर कर चुकी है कि बगैर घूस दिये पुलिस विभाग में कोई काम नहीं हो सकता। घूस देकर पुलिस विभाग के जरिये अपराधी और माफिया अपने विरोधियों को फर्जी मुकदमों में फंसाने का काम धड़ल्ले से कर रहे है। अभी हाल में ही थाना लाइन बाजार के प्रभारी द्वारा फोटो स्टेट का पैसा मांगने पर व्यवसायी व उसके परिवार की पिटाई किये जाने का प्रकरण सामने आया था। जिसमें विधायक हरेन्द्र प्रताप सिंह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिये पुलिस अधीक्षक से भी मिले। केवल तबादले और लाइन हाजिर करने से पुलिस की छवि सुधरने वाली नहीं।