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पीएम किसान सम्मान निधि में भ्रष्टाचार: निशाने पर ‘फर्जी किसान’, 47 गांवों के सत्यापन का आदेश, 1.5 लाख के नाम डिलीट! 
September 16, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू • पूूर्वांचल

फर्जी किसानों पर सरकार ने कसा शिकंजा



जनसंदेश न्यूज 
गाजीपुर। पीएम किसान सम्मान निधि में शासन के आदेश पर कृषि विभाग फर्जीवाडे़ की जांच करने के साथ ही पोर्टल से अपात्र लोगों का नाम डिलीट करना शुरू कर दिया है। वहीं, शासन से भेजी गई 47 गांवो के सत्यापन को लेकर विभागीय कर्मी जुट गए है। इस योजना में फर्जी रूप से पोर्टल पर नाम दर्ज कराकर धन हड़पने वाले किसानों पर भी विभाग बड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। इस कार्य के लिए तहसील स्तर के अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त किए गए है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत लाभार्थी किसानों को सालाना 6000 रुपये का लाभ दिया जाता है। लेकिन जिले में फर्जी कागजातों के आधार पर लाखों लोग पोर्टल पर जुड़ कर फर्जी रूप से सरकार की इस योजना का लाभ ले रहे है। सरकार के आदेश पर विभाग ऐसे किसानों का चिन्हित करने में लगी हुई है। बताया जा रहा है कि इस पोर्टल पर नौकरी पेशा से लेकर भूमिहीन लोग जुड़े गए है। इस योजना का लाभ लेने के लिए जालसाज इसमें भ्रष्टाचार करने में जुट गए। पांच किस्त कुछ ऐसे लोगों को भी मिल गई, जो इसके हकदार नहीं हैं। 

दरअसल, पीएम के निर्देश पर इस योजना को लागू कर चुनाव से पहले यह धनराशि किसानों के खातें में आनन-फानन में भेजी गई थी। जिसका वेरीफिकेशन ढंग से नहीं हो पाया था। लेकिन अब ऐसे ‘फर्जी किसानों’ पर सरकार सख्त है। शासन ने 47 गांव चिन्हित कर विभाग को सत्यापन कराने को कहा है। इसके अलावा फर्जी रूप से इस योजना के लाभ लेने वाले अपात्रों से रिकवरी का आदेश दिया है।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू होने से अब तक डेढ़ लाख लोगों का नाम पोर्टल से डिलीट किया जा चुका है। जिले में वर्तमान समय में पांच लाख लाभार्थियों का नाम दर्ज है। जिसमें चार लाख 28 हजार किसानों के खाते में धनराशि भेजी जा चुकी है। शेष 72 हजार ऐसे किसानों को से अभिलेख सहित कागजात मांगे जा रहे है। वही पोर्टल से लगातार अपात्रों से लेकर जो लोग अभिलेख नहीं जमा किये है, उनका नाम काटा जा रहा है। 

इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी मृत्युजंय सिंह ने बताया कि पोर्टल से पांच हजार अपात्र किसानों का नाम भी डिलीट कर दिया है। जिनके बारे में विभाग को सूचना मिली थी। वहीं सरकार के आदेश पर सत्यापन के लिए विभागीय कर्मियों को चिन्हित गांवों में लगा दिया गया है।