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नीम-हकीम से इलाज कराना पड़ा महंगा, हुई मौत, कपाउंडरी करते-करते बन गए डॉक्टर
September 16, 2020 • शिवम मोदनवाल • पूूर्वांचल

शिक्षा मात्र बीएससी, कर रहे थे मरीजों का इलाज



जनसंदेश न्यूज
कछवां/मीरजापुर। स्थानीय थाना क्षेत्र के बाड़ापुर गांव निवासी संतोष कुमार सिंह (56) वर्ष जो कि भारतीय जीवन बीमा के चुनार शाखा से अभिकर्ता थे। उनका अचानक 8 सितंबर को बुखार और खांसी की शिकायत हुई तो संतोष सिंह ने गांव के समीप ही कनकसराय गांव मे प्रैक्टिस कर रहे डाक्टर दिनेश मौर्या के यहां इलाज कराने गए। 

वहीं डाक्टर मौर्या ने जांच के दौरान जांच रिपोर्ट मे संतोष सिंह को टाइफाइड निकला बताया। जिसके बाद डाक्टर दिनेश मौर्या ने संतोष सिंह का इलाज शुरु कर दिया और दो दिन लगातार पानी चढ़ाने से लेकर तमाम दवाईयां दी। जिसके पश्चात 10 सितंबर को अचानक संतोष की तबीयत बिगड़ गयी और सांस फूलने लगा, साथ ही पेट में असहनीय पीड़ा शुरु हुआ। परिजनों ने उन्हें तत्काल कछवां स्थित क्रिश्चियन अस्पताल ले गए। जहां डाक्टरों ने कोरोना संक्रमित होने की बात कह कर वाराणसी रेफर कर दिया। 

परिजन अधिक देर ना करते हुए वाराणसी स्थित सरसुन्दर लाल अस्पताल ले गए। जहां कोरोना टेस्ट के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई और इलाज शुरु हुआ तो डाक्टरों ने बताया कि फेफड़ा संक्रमित हो गया है। इलाज के दरम्यान ही संतोष की मंगलवार को मौत हो गयी। वहीं संतोष के पुत्र ऋषभ का कहना है कि बीएचयू के डाक्टरों के अनुसार फेफड़े में पानी होने से फेफड़ा संक्रमित हो गया था। जिससे बुखार और सांस लेने मे तकलीफ हो रही थी। लेकिन बीएचयू आने से पहले इलाज गलत हुआ है। 

ऋषभ के अनुसार पिता संतोष को डाक्टर मौर्या ने एक घंटे के भीतर तीन बोतल पानी चढ़ाया। जिसमें मोनोसेफ, बोबेरान, एसीलाक दवा मिलाया गया था। वही मात्र बीएससी करने के पश्चात अपने आप को डाक्टर कहलाने वाले डाक्टर दिनेश मौर्या पिछले दिनों में कछवां के एक चिकित्सालय में कम्पाउंडर के रुप में कार्य करते थे। इनकी शिक्षा मात्र बीएससी है और अब ये कनकसराय गांव में स्वयं का क्लीनिक खोल मरीजों का इलाज करते हैं।