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मधुमक्खी पालन से 2 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई, शत्रुओं से बचाने के लिए बताए गये उपाय
June 28, 2020 • जनसंदेश न्यूज • वाराणसी-चंदौली

सेवापुरी ब्लाक के दौलतिया गांव में चल रही ट्रेनिंग में दी जानकारी

मधुमक्खियों को उनके शत्रुओं से बचाने के लिए बताए गये उपाय

सुरोजीत चैटर्जी

वाराणसी। मधुमक्खी पालन के प्रमुख शत्रु लाल चींटी, छिपकली, सांप, बड़ी बरैया और भंवरे हैं। वहीं, माइट भी मधुमक्खियों की शत्रु है। इनकी रोकथाम के लिए मौन बॉक्स स्टैंड के नीचे प्याली लगाकर पानी भर देना चाहिए। यह पानी प्रतिदिन बदलने की जरूरत है। बाग में या जहां मौन बॉक्स रखें, वह स्थान साफ-सुथरा रहे तथा निगरानी करते रहें। मौके पर खरपतवार, लाल चीटी और बरैया के छत्ते न हों। माइट लगने पर तय मात्रा में बॉक्स में सल्फर दवा का प्रयोग करना चाहिए।

सेवापुरी विकास खंड के दौतलिया गांव स्थित प्रेमचंद्र इंटर कॉलेज में चल रहे मौन पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम के पांचवें दिन रविवार को यह जानकारी जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने दी। मॉडल ब्लाक के तौर पर विकसित किये जा रहे इस विकास खंड में महकमे की ओर से स्वरोजगार तथा किसानों के आय में बढ़ोतरी के उद्देश्य से यह ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इस मौके पर प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खियों को उनके शत्रुओं से बचाने, शहद और सहायक उत्पादों के माध्यम से आमदनी में वृद्धि के गुर बताए गये।

कार्यशाला में वैज्ञानिक रविशंकर मिश्र ने बताया गया कि मौन पालन के सहायक उत्पादों में पराग, मोम, प्रोपोलिस और मोहन विष प्रमुख हैं। 25 मधुमक्खी बॉक्स की एक इकाई से पोलेन ट्रैप का प्रयोग कर प्रतिदिन छह किलो पराग एकत्र कर लगभग 80 हजार रुपये तक की आय संभव है। इतने ही बाक्स से 15 हजार रुपये तक का मोम और अप्रैल से अक्टूबर तक आॅफ सीजन में 700 रुपये में प्रोपोलिस जाली लगाकर 60 किलो तक प्रोडक्ट बेचकर 42 हजार रुपये की आमदनी की जा सकती है। आॅफ सीजन में कृतिम भोजन एवं रखरखाव का खर्च निकालना मुमकिन है।

वहीं, 25 बॉक्स पर ही कम से कम दो बार मौनवंश का विभाजन कर प्रति बॉक्स अतिरिक्त रूप से 250 रुपये प्रति फ्रेम की दर से 20 मौन वंश पर पांच हजार रुपये प्रति बॉक्स के अनुसार एक लाख रुपये से अधिक मौनवंश की बिक्री का व्यापार किया जा सकता है। वहीं, कुछ और मेहनत कर स्लाइड उपकरण लगाकर मधुमक्खियों के डंक से विष निकालें तो 60 हजार रुपये से लेकर₹80 हजार रुपये कमाना संभव है। इस व्यवसाय में अतिरिक्त रूप से दो लाख रुपये की आमदनी की जा सकती है। वर्कशॉप में उद्यान निरीक्षक ज्योति कुमार सिंह, ब्लाक प्रभारी सुनील कुमार भास्कर, पूजा सिंह, रेखा देवी आदि की प्रमुख उपस्थिति रही।