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काशीवासियों से प्रधानमंत्री मोदी ने भोजपुरी में की बात, किसानों और युवाओं को विभिन्न व्यवसायों से जुड़ने का आवाह्न
July 9, 2020 • सुरोजीत चैटर्जी • वाराणसी-चंदौली

- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से काशी के समाजसेवियों संग किया संवाद

- कहा: काशी में जल्द ही खुलेंगे कई कारोबार की नई संभावनाओं के द्वार

- क्रूज टूरिज्म, लाइट-साउंड शो, गंगाघाट पुनरुद्धार आदि पर चल रहे कार्य

- सावन के महीने में काशीवासियों का दर्शन होना स्वयं में सौभाग्य की बात


सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र की जनता से कहा है कि कोरोना महामारी खत्म होने के बाद जब स्थितियां सामान्य होंगी तो बनारस की पुरानी रौनक भी तेजी से लौटेगी। जिले में वर्तमान में चल रहे हजारों करोड़ रुपये की लागत से चल रही परियोजनाओं से तमाम लोगों को लोगों को रोजी-रोटी मिलती है। आने वाले वक्त में हालात संभलने पर शहर के विकास की गति को तेजी से बढ़ाने के लिए अभी से तैयारी भी करनी है। हाल ही में सरकार के फैसलों के बाद यहां की साड़ियां व अन्य हस्तशिल्प सहित डेयरी, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन के व्यवसाय में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। विश्व में बी-वैक्स की बहुत अधिक मांग है। इसको पूरा करने का प्रयास चल रहा है।
लॉक डाउन के जरूरतमंदों के लिए विभिन्न स्तर पर योगदान दे चुके संस्था-संगठनों के प्रतिनिधि के साथ गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री संबोधित कर रहे थे। कमिश्नरी में यह आयोजन था। उन्होंने गत दिनों वाराणसी के आला अफसरों के साथ विकास कार्य संबंधी वृस्तृत समीक्षा बैठक की चर्चा करते हुए बताया कि बताया कि व्यापाक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। कोरोना महामारी से उबरने के बाद पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में क्रूज टूरिज्म, लाइट एंड साउंड शो, दशाश्वमेध घाट का पुनरुद्धार, गंगा आरती के लिए ऑडियो-वीडियो स्क्रीन सिस्टम, घाटों पर और भी बेहतर व्यवस्था आदि परियोजनाओं को तेजी से पूर्ण करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
मोदी के किसानों और युवाओं से उन  व्यवस्याओं में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी का आह्वान किया जिसमें हस्तशिल्प, डेयरी, मधुमक्खी और मछली पालन आदि के कार्य हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी के प्रयासों से काशी भारत के एक बड़े एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित हो सकती है और हमें एशाा करना चाहिए। इस शहर को हम आत्मनिर्भर भारत अभियान की प्रेरक स्थली के रूप में भी विकसित स्थापित करें। उन्होंने कहा कि आप सबके दर्शन करने का मौका मिला, अच्छा लगा। सावन के महीने में काशीवासियों का दर्शन होना स्वयं में सौभाग्य होता है। लॉक डाउन में आपने जिस सेवाभाव से कार्य किया और अभी भी जिस लगन के साथ काम कर रहे हैं, उसके लिए आप सभी का आभार।


मोदी ने प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आपलोगों ने परोपकार व सेवाभाव के जरिये सभी को प्रेरित किया है। काशी में बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा, दोनों विराजते हैं। यहां कोई भूखा नहीं सोता। आप सभी और तमाम तमाम संगठनों समेत हमारे के लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि इस बार गरीबों की सेवा का माध्यम भगवान ने हम सबको बनाया है, विशेषकर आप सबको बनाया है। एक तरह से आप सभी मां अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ के दूत बनकर हर जरूरतमंद तक पहुंचे हैं। जरूरतमंदों के लिए सेवा करने वालों को मैं प्रणाम करता हूं। मैं आपसे बात कर रहा हूं तो सिर्फ जानकारी नहीं ले रहा बल्कि प्रेरणा और आशीर्वाद ले रहा हूं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अखिल भारतीय केशरवानी वैश्य युवक सभा के संदीप केशरी, राष्टकृीय रोटी बैंक की पूनम सिंह, गायत्री परिवार रचनात्मक ट्रस्ट के गंगाधर उपाध्याय, , बुनकर एवं समाजसेवी हाजी अनवर, विदुषी महिला मंडल की संस्थापक मनीषा अग्रवाल, एचडीएफसी बैंक के मनीष टंडन, सेंट्रल सिंधी पंचायत के सुरेंद्र लालवानी, भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष महेशचंद्र श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रवक्ता नवरतन राठी, अरविंद मिश्र आदि की प्रमुख उपस्थिति रही।

भोजपुरी में शुरु की बात

- पीएम मोदी ने गुरुवार को बनारसवासियों के साथ संवाद के बाद अपना संबोधन भोजपुरी में शुरु किया। उन्होंने कहा कि काशी के पुण्य धरती के आप सब पुण्यात्मा लोगन के प्रणाम हौ। सावन महीना चल रहा है। ऐसे में बाबा के चरणों में आने का मन हर किसी को करता है। लेकिन जब बाबा की नगरी के लोगों से रूबरू होने का मौका मिला है तो ऐसा लगता है कि आज मेरे लिए एक दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। सबसे पहले तो आप सभी को भगवान भोलेनाथ के इस प्रिय महीने की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

आपने दिखा दी अपनी जीवटता
- बनारस के सांसद एवं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह भगवान भोलेनाथ का ही आशीर्वाद है कि कोरोना के इस संकटकाल में भी हमारी काशी उम्मीद और उत्साह से भरी हुई है। यह सही है कि लोग बाबा विश्वनाथ धाम इन दिनों नहीं जा पा रहे हैं। और वह भी सावन में न जा पाना, तो आपकी पीड़ा में समझ सकता हूं। ये भी सही है कि मानस मंदिर हो, दुर्गाकुंड हो, संकट मोचन में सावन का मेला, नहीं लग सका। सब कुछ स्थगित हो गया है। लेकिन यह भी सही है कि ऐसे दौर में मेरी काशी और हमारी काशी ने इस अभूतपूर्व संकट का डटकर मुकाबला किया है। आज का यह कार्यक्रम भी इसकी एक कड़ी ही है। कितनी ही बड़ी आपदा क्यों न हो, कोई भी काशी के लोगों की जीवटता का मुकाबला नहीं कर सकता। आपने दिखा दिया कि जो शहर दुनिया को गति देता हो, उसके सामने कोरोना क्या चीज है।

बनारस की पारंपरिक अड़ी हुई डिजिटल
- मोदी ने कहा कि मुझे बताया गया है कि काशी में चाय की अड़ियां आदि की विशेषताएं हैं कोरोना के चलते सूनी हो गयी हैं, वह अड़ियां अब डिजिटल स्तर पर आरंभ हो गयी हैं। अलग-अलग क्षेत्र की विभूतियों ने अड़ी परंपरा को तो जीवंत किया है। यहां की जिस संगीत परंपरा को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, गिरिजा देवी, हीरालाल यादव जैसे महान साधकों ने समृद्ध किया, उसे आज काशी के सम्मानित व नई पीढ़ी के कलाकार आगे बढ़ा रहे हैं। इस तरह के अनेक काम पिछले तीन-चार महीने में काशी में निरंतर हुए हैं।

संसदीय क्षेत्र का लगातार ले रहे फीडबैक
संवाद के दौरान संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया किलॉक डाउन के दौरान वह अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बारे में लगातार फीडबैक ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सरकार के अलग-अलग लोगों से संपर्क में था। काशी से जो खबरें पास आती थीं उस आधार पर मैं बात करता था कि उनको क्या करना है और क्या नहीं करना है। आप में से कई लोगों से भी फोन पर नियमित रूप से बात होती थी। मैं उनके सुख-दुख पूछता था। जानकारियां और फीडबैक लिया करता था। उस दौरान मैं जानकारी लेता था कि संक्रमण को रोकने के लिए कौन क्या कदम उठा रहा है। अस्पतालों की स्थिति क्या है और वहां क्या व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी लेता रहता हूं कि क्वारंटीन को लेकर क्या हो रहा है। बाहर से आए श्रमिकों के लिए हम कितना प्रबंध कर पा रहे हैं।

बदलनी पड़ेगी आदत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संवाद के दौरान कहा कि हम सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति चाहते हैं। अब रास्तों पर थूकने की आदत छोड़नी होगी, उसमें भी हमारा बनारसी पान। हमें आदत बदलनी पड़ेगी। वहीं, दो गज की दूरी, गमछा या फेस मास्क लगाना है। हाथ धोने की आदत न खुद छोड़नी है और न ही किसी और को छोड़ने देनी है। अब इसे हमारा संस्कार और स्वभाव बना देना है।

यूपी के प्रयासों को सराहा
पीएम मोदी ने संवाद के दौरान वाराणसी समेत यूपी में कोरोना के इस दौर समेत लॉक डाउन के दौरान किये गये प्रयासों की जमकर सराहना की। विशेषकर वाराणसी में वाहन के अभाव की स्थिति में डाक विभाग की गाड़ियों के प्रयोग को सराहा। साथ ही कहा कि ब्राजील देश जितनी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में तुलनात्मक रूप में कोरोना का संक्रमण और मृत्यु दर बेहद कम होने का कारण मुकम्मल कार्ययोजना के साथ एकजुट प्रयास ही है। भारत के अन्य राज्यों ने भी इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर पूरी दुनिया में उदाहरण पेश किया है। क्योंकि सौ साल पहले हुई महामारी के बाद इस बार की महामारी को लेकर दुनिया के तमाम विशेषज्ञों ने भारत को लेकर जो आशंकाएं जतायी थीं, उसके उलट भारत ने नजीर पेश की है। सेवाभाव और कार्य से आमलोगों के बीच आपकी विश्वसनीयता भी बढ़ती है।