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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर सीईओ के खिलाफ अवमानना डालने वाले याचीकर्ताओं पर पांच-पांच का जुर्माना, हाईकोर्ट की हरी झंडी
June 19, 2020 • अश्वनी कुमार श्रीवास्तव • वाराणसी-चंदौली


कॉरिडोर निर्माण को हाईकोर्ट की हरी झंडी

नोटिस कोर्ट ने की खारिज

पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है विश्वनाथ कॉरिडोर

एक महीने के अंदर विश्वनाथ बोर्ड में जुर्माना जमा करने का सख्त निर्देश

अश्वनी कुमार श्रीवास्तव
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के मामले में विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह के खिलाफ इलहाबाद में दालिख अवमानना नोटिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले को खारिज करते हुए तीनों याचिकर्ताओं पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। इससे विश्वनाथ कॉरिडोर निर्माण का रास्ता साफ हो गया।  
गंगा के किनारे दो सौ मीटर परिधि में निर्माण प्रतिबन्ध के 2012 के आदेश के मद्देनजर दाखिल हुयी याचिका पर इलहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। मंदिर के सीईओ विशाल सिंह, पीडब्ल्यूडी के दो अभियंताओ के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गयी थी। एडिशनल एडवोकेट जनरल एमसी चतुर्वेदी, विनित संकल्प व रवि पांडे ने विशाल सिंह और दोनो अभियंताओ का पक्ष रखते हुए इस पर बहस किया जिस पर हाईकोर्ट ने तीनों याचिकर्ता बनारस के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, बनारस बार के पूर्व महामंत्री विनोद शुक्ला व बनारस के ही अधिवक्ता सुनील कुमार गुप्ता पर पांच-पांच हजार रुपए का हर्जाना भी लगाते हुए जमकर लताड़ लगायी। इसके साथ ही काशी विश्वनाथ बोर्ड में बतौर कास्ट एक महीने के अंदर जुर्माना को जमा करने का आदेश भी दिया। 
ज्ञात हो कि याचिकर्ता ने हाइकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि विशाल सिंह,सीईओ विश्वनाथ कॉरिडोर जनहित याचिका कोटिल्य सोसायटी बनाम स्टेट ऑफ यूपी मे पारित आदेश दिनांक 27.05.2012 का जानबुझ कर अवहेलना कर रही है जिसके अनुसार वाराणसी विकास प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करना था कि गंगा नदी के बाढ़ के उच्चतम बिन्दु से 200मीटर के भीतर कोई नया निर्माण नही होगा। 
याचिका कर्ताओ का यह कहना था कि काशी विश्वनाथ स्पेशल एरिया विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिंह ने एक टेन्डर जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर के चारो तरफ निर्माण कराना चाहते है जो 200मीटर परिधि के भीतर है, विशाल सिंह व पीडब्ल्यूडी के दो अभियंताओ का पक्ष रखते हुये एडिशनल एडवोकेट जनरल एम सी चतुर्वेदी ,विनित संकल्प और रवि पांडे ने कहा कि तीनो याचिकाकर्ताओं ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग किया है,महत्वपुर्ण तथ्यो को छुपाया है और याचिका मे गलत बाते कही गयी है दोनो पक्षो को सुनने के बाद हाइकोर्ट ने याचिकाकर्ताओ को जमकर लताड़ लगाते हुए कहा कि याची को क्लीन हैन्ड से कोर्ट आना चाहिये और समस्त तथ्यो को कोर्ट के समक्ष रखना चाहिये अन्यथा वह अदालत को गुमराह करने का दोषी माना जायेगा,याची को पिक एण्ड चुज करने नही दिया जा सकता।