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कानपुर एनकाउंटर केस: विकास दुबे ने वायरल ऑडियो में लिया दो भाजपा विधायकों का नाम, मचा हड़कंप, 2.5 लाख इनाम राशि
July 6, 2020 • जनसंदेश न्यूज • देश-विदेश


जनसंदेश न्यूज़
लखनऊ। यूपी के कानपुर देहात के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी विकास दुबे अभी भी पुलिस की गिरफ्त के बाहर है। पुलिस उसको मध्यप्रदेश, राजस्थान के अलावा अन्य कई जगहों पर ढूंढ़ रही है, लेकिन अभी तक उसके हाथ खाली है। इस बीच विकास दुबे से जुड़े नये-नये मामले भी सामने आ रहे है। सोमवार को विकास दुबे का वीडियो और ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दो भाजपा विधायकों का नाम सामने आ रहा है। इसकी सूचना लगते ही विधायकों सहित भारतीय जनता पार्टी में खलबली मच गई। मामला बढ़ता देख दोनों विधायक सामने आकर अपना पक्ष रखा और विकास दुबे से किसी भी तरह के संबंधों से इनकार किया। 
मोस्ट वांटेड अपराधी बन चुका विकास दुबे पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। पुलिसकर्मियों के सामूहिक हत्याकांड के तीन दिन बीतने के बाद भी आज तक विकास पुलिस की पकड़ में नहीं आया है। इसी बीच उसके ऊपर इनाम की राशि भी बढ़ा दी गई। विकास दुबे के ऊपर 2.5 लाख का इनाम घोषित किया गया है।
सोमवार को वायरल ऑडियो/वीडियो में विकास दुबे दो भाजपा नेताओं का नाम ले रहा है। जिसमें बिठूर भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा और बिल्हौर विधानसभा से भाजपा विधायक भगवती प्रसाद सागर का नाम लिया है। हालांकि दूसरी तरफ यह ऑडियो 2017 का बताया जा रहा है। उसके बावजूद वायरल ऑडियो ने भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। ऑडियो/वीडियो वायरल होने के बाद दोनों नेताओं ने संबंधित टीवी चैनल पर आकर अपना पक्ष रखते हुए विकास दुबे से संबंधों से इनकार किया है।
बिठूर से भाजपा विधायक अभिजीत सिंह सांगा का कहना है कि ये अपराधी है और सत्ता का संरक्षण लेने के लिए इस तरह से नाम लेता रहा है, वह ऐसे ही झूठ बोलता है। हमारा कभी कोई संबंध नहीं रहा है।
-बिल्हौर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक भगवती प्रसाद सागर ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो वर्ष 2017 का है और उस वर्ष चुनाव में विकास दुबे ने खुलकर बसपा प्रत्याशी का साथ दिया था। बसपा प्रत्याशी के साथ विकास दुबे और एक फिल्मी हीरोइन ने मंधना से बिल्हौर तक रथ भी निकाला था। इसकी वीडियोग्राफी भी उस समय चुनाव आयोग के आदेश पर हुई थी, जो जिला प्रशासन के पास होगी अधिकारी उसे देख सकते हैं। इससे पहले 2012 में वह चुनाव लड़े ही नहीं थे। विकास इतना शातिर है कि वह कभी भी किसी का भी नाम लेकर उसे फंसाने का प्रयास कर सकता है। कोई अधिकारी यह कह दे कि मैंने कभी उसकी सिफारिश की है तो मुझे फांसी की सजा भी मंजूर है।