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जौनपुर के लाल की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, शहीद के अबोध बेटे को देख झलक उठी हर शख्स की आंखे
August 14, 2020 • महर्षि सेठ • इलाहाबाद



जनसंदेश न्यूज़
जौनपुर। जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के इजरी निवासी कांता यादव के पुत्र जिलाजीत यादव (25) पुलवामा में बीते मंगलवार की रात आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। जनपद के लाल आरआर 53 बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर जौनपुर उनके पैतृक आवास पहुंचा। जहां भीगीं पलकों के साथ हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे के साथ शहीद सैनिक का स्वागत किया। वहीं जनपद के बेटे की शहादत को नमन करने के लिए भारी संख्या में लोग उनके अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
पूर्व राज्यमंत्री डा. केपी यादव भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। जहां एक तरफ शहादत पर हर कोई गर्व कर रहा था, वहीं शहीद के परिजनों को अपने इकलौते बेटे को खोने का गम भी था। शहीद जिलाजीत यादव की मां अपने 6 माह  के पोते को सीने से चिपकाए हुए थी। डा. केपी यादव शोक संतप्त दादी को सांत्वना देने गए तो बच्चे को गोदी में उठा लिया। अबोध मुन्ना को देखकर इस राजनीतिज्ञ की आंखें छलक उठीं। 
उन्होंने शहीद की मां उर्मिला यादव व शहीद की पत्नी पूनम यादव से वादा किया वे इस बच्चे की लालन पालन और  शिक्षा-दीक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाएंगे। इसके बाद बच्चे ने पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि दी। पूरे गांव में अंतिम यात्रा पर फूल बरसते रहे। गांव का चप्पा-चप्पा भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, जिलाजीत तेरा नाम रहेगा, देखो-देखो कौन आया, जौनपुर का शेर आया- जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा।


वहीं डॉक्टर केपी यादव ने रामघाट पर गार्ड ऑफ ऑनर के उपरांत प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी, राज्य मंत्री गिरीश यादव, एमएलसी विद्या सागर सोनकर, केराकत दिनेश कन्नौजिया बदलापुर विधायक रमेश मिश्र और जिला अधिकारी दिनेश  कुमार सिंह व पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार के समक्ष सपा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर के पी यादव परिवार के साथ एक प्रस्ताव रखते हुए मांग किया कि यूपी सरकार शहीद जिलाजीत के परिजन को 50 लाख के जगह पर एक करोड़ की धनराशि प्रदान करते हुए शहीद जिलाजीत यादव के आश्रित परिजन को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी दे।
उन्होंने कानपुर में शहीद के आश्रित को एक करोड़ रुपया दिया गया तथा दिल्ली सरकार शहीदों के सम्मान में एक करोड़ रुपया दे रही है, तो यूपी सरकार क्यों दोहरा मापदंड अपना रही है। इस प्रस्ताव पर उपस्थित जनपद के जनप्रतिनिधियों व जिले के आला अफसरों ने आश्वासन देते हुए प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेजने का वादा किया।