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गजब खेल: एक ही विद्यालय में मां-बाप, बहू-बेटा सब कक्षा नौ के विद्यार्थी! एक नहीं दो से तीन बार लिया दाखिला
July 17, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू • जौनपुर-गाजीपुर

एक ही सत्र में दो जगह दाखिला, उतारी स्काॅलरशिप

ऑनलाइन हो या ऑफलाइन सभी प्रक्रिया में शिक्षा माफिया पास



जनसंदेश न्यूज़
गाजीपुर। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल योजना में फर्जीवाडे़ को लेकर सभी सीमाएं तोड़ दी गई है। शिक्षा माफियाओं ने धन हड़पने के लिए सरकारी सभी नियम को ताक पर रखकर एक ही स्कूल में पूरे परिवार के सदस्यों का दाखिला दिखा दिए है। इतना ही नहीं उन्ही सदस्यों को दूसरे स्कूलों में भी एक ही सत्र में दो से तीन बार दाखिला दिखाया है। जिसमें परिवार के माता, पिता, पति, पत्नी सहित अन्य लोगों को शामिल किया गया है। जिनकी उम्र 36, 40, 50 और 70 वर्ष तक की है उन्हें कक्षा नौ का छात्र बनाया गया है। जबकि उस स्कूल की मान्यता सिर्फ जूनियर तक की है।
बता दें कि शिक्षा माफियाओं ने बिरनो ब्लाक स्थित भड़सर ग्राम सभा स्थित दो जूनियर हाई स्कूल का नाम दिखाकर उस स्कूल में कक्षा नौ के छात्र बनाकर माता पिता पुत्र और पत्नी सहित अन्य लोगों के नाम से छात्रवृति हड़प लिया है। जबकि इस कार्य में उनके अलग-अलग बैकों के खाता नंबर को भी डाला गया है ताकि निकालने में आसानी हो। इतना ही नहीं एक ही स्कूल में दो से तीन बार उन्ही सदस्यों को ओबीसी एवं अनुसूचित वर्ग का भी दिखा दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह कारनामा करने वाला शिक्षा माफिया राजनीतिक परिवार से भी जुड़ा हुआ है। माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि सभी प्रक्रिया आॅनलाइन होने के बावजूद इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।
दरअसल, नेशनल स्काॅलरशिप के जरिए जिले में करोड़ों के घोटाले को लेकर विभागीय जांच शुरू किया गया है। लेकिन जांच अधिकारी द्वारा इस गति को बहुत ही धीमा चलाया जा रहा है। इस घोटाले में जिले के बड़े बड़े कालेज संचालकों के साथ बड़े नाम सामने आने बाकी है। हालांकि इस घोटाले के मामले को लेकर राजनीतिक पार्टी भी इसे आगे करने में लगे हुए है। जबकि इस योजना के तहत काफी वर्षो से फर्जीवाडे़ को अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन संबंधित अधिकारियों  को इस कार्य की लगता है कि भनक तक नहीं है। या तो इस मामले को जानकर अंजान बने हुए है। 
बताया जा रहा है कि इस योजना के तहत फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रूपए गबन करने वालों में पचास से अधिक कालेज शामिल है। इन कालेज संचालको ने फर्जीवाड़ा कर अकूत संपति बनाया है। जबकि इसका हक पाने वाले छात्र इस लाभ से वंचित हो गए है। दरअसल, सभी सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर गरीब वर्ग के छात्रों को प्रोत्साहन के तौर पर यह छात्रवृति देते है ताकि वह आसानी से आगे की शिक्षा ले सकें। मगर शिक्षा माफिया इन योजनाओं को जमीन पर उतरने ही नहीं देते।