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गाजीपुर में कोरोना की ललकार, संख्या पहुंची दो हजार पार, शनिवार को मिले 97 पॉजिटिव मरीज
August 14, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू++++ • इलाहाबाद
जिले में वायरस की लगातार दस्तक से आमजन में ख़ौफ़ 
जनसंदेश न्यूज 
गाजीपुर। जिले में कोरोना का कहर हर दिन तेज गति के साथ बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार को 97 पॉजिटिव मरीज मिले है। वहीं शुक्रवार की शाम को आई कोरोना रिपोर्ट मर 42 लोगों संक्रमित पाए गए। जिले में हर दिन बढ़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव लोग मिले हैं।  कोरोना संक्रमितों की संख्या दो हजार पाए हो चुकी  है। साथ ही अब तक कोरोना से 13 लोगों की मौत हो चुकी है। उधर कोरोना संक्रमण की रफ्तार थम नहीं रही है। जबकि अच्छी खबर यह है कि प्रति दिन संक्रमित स्वस्थ भी हो रहे हैं।
जिले में फिलहाल कोरोना वायरस बेलगाम स्थिति में है। जून में किए गए अनलाक के कारण जिले में संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। मई के अंत तक मरीजों की संख्या 122 थी और वायरस का प्रसार भी एक तरह से कंट्रोल में ही था। लेकिन अनलाक वन में वायरस का प्रसार बड़ा और शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में मरीजों का मिलना शुरू हो गया। अब मध्य अगस्त आते-आते कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ कर दो हजार से ऊपर  पहुंच गई है। कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते मार्च के अंतिम सप्ताह में लाकडाउन लागू किया गया था। चार चरण में किए गए लाकडाउन के कारण वायरस का प्रसार सीमित क्षेत्र तक रहा। जिले में दो अप्रैल को पहला मरीज सामने आया। इसके बाद 31 मई तक जिले में कोरोना संक्रमितों की संख्या 122 तक पहुंची थी। अब तक लगभग 41673 हजार से ज्यादा सैंपल की जांच की गई जा चुकी है। जबकि 36 हजार 950 के करीब रिपोर्ट भी आ गई है। फिर भी 2893 से ज्यादा सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है। 2002 लोगों में कोरोना पाज़िटिव की पुष्टि हुई है। 14 जुलाई तक 13 व्यक्तियों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार , शनिवार को मिले मरीजो में से मुहम्मदाबाद, सादत, सैदपुर, जमानिया, देवकली, बाराचवर ब्लॉक  सहित नगर में संक्रमित पाएं गए। जिनको  होम क्वारंटीन से लेकर हॉस्पिटल में व्यवस्था कराई जा रही हैं। 
इनसेट-
आंखों के इलाज में कोरोना वायरस बाधक
गाजीपुर। कोरोना दूसरी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज में बड़ा बाधक बन रहा है। आंखों के मरीज भी इससे अछूते नहीं है। स्थिति यह है कि अस्पतालों में मोतियाबिंद व कालामोतिया जैसी बीमारियों की सर्जरी काफी कम हो गई है। अंधेपन से पीड़ित कार्निया प्रत्यारोपण सर्जरी नहीं हो पा रही है। डॉक्टर कहते हैं कि लॉकडाउन में समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण कई लोगों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है। लॉकडाउन के बाद भी स्थिति पटरी पर नहीं आई है। ऐसे में डॉक्टर कहते हैं कि अंधेपन के मामले बढ़ सकते हैं।
 
कोरोना संक्रमण बढ़ने से वकील चिंतित
गाजीपुर। जिले में कोरोना संक्रमण का प्रकोप निरंतर बढ़ रहा है। इसके चलते जिला न्यायालय से लेकर तहसीलों में स्थित न्यायालय तक प्रभावित है। केस न मिलने से वकीलों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही है। वकील सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देख रहे है। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई है। वही कोरोना संक्रमण के कारण अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्त महीनों में केसों का दाखिला का सिलसिला धीमा है। साथ ही लंबित केसों की सुनवाई भी अधर में है।
 
मास्क का नहीं किया जा रहा सही ढंग से उपयोग
गाजीपुर। शहर क्षेत्र से लेकर कस्बों के बाजारों में हर जगह मास्क पहने लोग मिलेंगे। लेकिन देखा जा रहा है कि अधिकांश लोग मास्क को गले में लटकाए रहते है। इसका उपयोग कोरोना वायरस से बचाव के लिए नहीं,  बल्कि पुलिस के डर से करते है। क्योंकि डर बना रहता है कि पुलिस चालान न काट दे या पुलिस का डंडा न खाना पड़े। पूछे जाने पर कई दुकानदार और सामान खरीदने आए ग्राहक भी स्वीकारते हैं कि कोरोना वायरस से ज्यादा पुलिस के भय से मास्क लगाते है। यही कारण है कि अधिकांश लोग मास्क तो लगाए रहते हैं लेकिन मास्क का नाक और मुंह से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहता। मास्क तो गले की शोभा बढ़ाता दिखता है। वर्दीधारी को देखते ही मुंह और नाक पर लग जाता है। जबकि मास्क का सही उपयोग उनके लिए ही फायदेमंद है। आज ऐसे लोगों की लापरवाही के कारण ही जिले में तेजी से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। जरूरत है कि सभी ईमानदारी से सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करें।
 
नाम- पते का खेल, कोरोना से जंग कर रहा फेल 
गाजीपुर। गलत नाम और पता दर्ज कराकर बेवजह गुमराह करने वाले ऐसे कई केस स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीमों का सिरदर्द बढ़ा चुके है। अनजाने ही सही, यह हरकत कोरोना के खिलाफ जंग में परेशानी खड़ी कर रही है। कोरोना का खतरा बढ़ता देख स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलग-अलग स्थानों पर स्क्रीनिंग और सैंपलिंग का काम कर रही है। इसके साथ ही ऐसे लोगों का सर्वे भी कराया जा रहा है जो पहले अपनी सैंपलिंग करा चुके है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि कुछ लोग अपना नाम, पता के साथ मोबाइल नंबर भी गलत लिखा रहे है। विभागीय टीमों को इन्हें खोजने के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे समय की बर्बादी होती है। पूरे जिले में अलग-अलग समय पर ऐसे करीब 50 मामले सामने आए है।