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गाजीपुर की होनहार बेटी का यूं जाना कर रहा हर किसी को मर्माहत...मां-पिता की हालत देख रो पड़ रहे हैं लोग
July 8, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू • इलाहाबाद


भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जिलें की होनहार बेटी मंजरी

मंजरी कविताओं की थी शौकीन

जनसंदेश न्यूज़
भांवरकोल/गाजीपुर। जिले की होनहार बेटी बलिया में तैनात अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय अब इस नश्वर जगत में नही रही। लेकिन जिस तरह से सोमवार की रात में उसे अपने बेडरूम में पंखे के सहारे दुपट्टे लटकते हुए देखा गया। वह अपने आप में यक्ष प्रश्न खड़े कर देने वाले हैं। जिसका उत्तर फिलहाल किसी के पास नही है। प्रशासन मुकदर्शक बना हुआ है। 
एक अधिकारी के संस्कार में विभागीय किसी कर्मचारी का शामिल न होना, उसके परिजनों को बेडरूम में प्रवेश न होने देना, शव के पास माता पिता आदि को न जाने देना, परिवार जनों की अनुपस्थिति में ही लटकते शव को उतार लेना, रोने गिड़गिड़ाने पर भी परिवार के लोगों को बिटिया के शव से लिपटना तो दूर छूने तक न देना आदि अनेकानेक प्रश्न हैं जो स्वयं फांसी लगा लेने बात किसी को पच नही रही ही है। 
तेज तर्रार अधिकारी मणि मंजरी अपनी माता-पिता की एकलौती सुपुत्री थी। कौशिलेश व विजयानंद उससे बड़ा दो भाई हैं। माता गीता राय व पिता जयठाकुर राय की हालात को देखकर हर कोई बिना रोये नहीं रह पाता था। मां जहां घर के अंदर बेसुध पड़ी थी वहीं अभागा पिता बाहर के बरामदे में निर्जीव हालत में चौकी पर बेसुध लेटें बिलख रहे थे उन्हे दवाइयां दी गयी थी ताकि कोई अनहोनी न हो सके। उनके सामने जो भी आता बिलख पड़ते है। इस कारण उनके सामने किसी को जाने की मनाही थी। वें चिल्ला कर बस यही कह रहे थे कि मेरी मंजरी कायर नहीं थी बल्कि मारकर लटका दिया गया था। 
उससे माफिया अवैध कार्य कराने के लिए राजनीतिक दबाव डाल रहे थे, जो करने को मंजूरी तैयार नहीं थी। मंजरी की पूरी शिक्षा दीक्षा अपने मामा के यहां हरपुर बलिया में रह कर हुआ था। इंटर नवोदय विद्यालय सिंहाचवर के बाद बी ए,एमए बीएचयू वाराणसी से किया था। वह आईएएस बनना चाहती थी। वह सुंदर कविताएं लिखती थी, जो विश्वविद्यालय की पत्रिकाओं में अक्सर प्रकाशित हुआ करता था। मंजरी का अंतिम संस्कार महावीर गंगाघाट बलिया में आज रात ही करने के बाद दिन के बारह बजे के करीब सभी कनुवान आ गए थे। 
आते ही गमगीन पूरा गांव उनके घर उमड़ पडा था और जानना चाहते थे कि कनुवान बेटी को किसने मारा और क्यों? मंजरी चली गयी बेटी के हाथ पीले करने के पिता के सामने बालु की तरह भहर जाने के बाद समाज एक ही यक्ष प्रश्न करता है कि आखिर कब तक मंजरी जैसे ईमानदार, तेजतर्रार एक अधिकारी भ्रष्टाचार की भेंट चढता रहेगा? सही जांच का इंतजार समाज कर रहा है ताकि मंजरी के साथ न्याय हो सके।