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ई-कंटेंट बनाने में नहीं करनी चाहिए नकल, शिक्षकों को इस नई विधा के प्रति करना होगा जागरूक: प्रो. टीएन सिंह
June 25, 2020 • जितेन्द्र श्रीवास्तव • वाराणसी-चंदौली


जितेन्द्र श्रीवास्तव
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि हमें ई-कंटेंट बनाने में किसी की नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि मौलिक कंटेंट बनाना चाहिए। वह हरिश्चंद्र स्नाकोत्तर महाविद्यालय एवं राजकीय महाविद्यालय ओबरा-सोनभद्र के संयुक्त बैनर तले गुरुवार से शुरू हुए ‘ई-कंटेंट डेवलपमेंट फॉर ऑनलाइन टीचिंग एण्ड लर्निंग नीड ऑफ द आवर’ विषयक सप्त दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे।
कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि प्रस्तुत किये जाने वाला कंटेंट नीरस नहीं होना चाहिए और उसमें गुणवत्ता भी होनी चाहिए। ऑनलाइन टीचिंग में श्रोताओं से विचारों का आदान-प्रदान करने की व्यवस्था को शामिल किये जाने का भी प्रयास होना चाहिए, क्योंकि सूचनाओं का जब परस्पर आदान-प्रदान होता है तो प्रस्तुत सामग्री और भी रोचक हो जाती है। परंतु ये विधा नई है, इस कारण पहले हमें अपने शिक्षकों को इसके विषय में जानकारी देते हुए जागरुक करना होगा। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज के असिस्टेंट डायरेक्टर डा. बीएल शर्मा ने कहा कि भारत को इस दिशा में अभी बहुत कार्य करना है। उन्होंने ई-कंटेंट के तरीकों और विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ शिक्षा शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं डीन स्कूल ऑफ एजुकेशन प्रो. अरविंद कुमार झा ने कहा कि ई-कंटेंट बनाना एक सहज प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात जोर देकर कहा कि हमें तकनीक से डरने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि उससे निरंतर जूझने की आवश्यकता है। हम सब कुछ सीख सकते है। उनका कहना था कि भविष्य में हम सभी को ई-लर्निंग  की आवश्यकता होगी। इसके लिए अभी से हमें सीखने की प्रक्रिया में लग जाना चाहिए। टेक्निकल सपोर्ट डा. साधना प्रजापति ने किया। इस कार्यशाला में पूरे देश से लगभग 2500 लोगों ने पंजीकरण कराया है। अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डा. ओमप्रकाश सिंह ने किया। संचालन वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अनिल प्रताप सिंह ने किया। धन्यवाद राजकीय पीजी कॉलेज ओबरा के प्राचार्य डा. प्रमोद कुमार ने दिया। इस अवसर पर डा. प्रदीप कुमार पांडे, डा. सुनील कुमार, डा. अशोक कुमार सिंह, डा. उदयन मिश्र के साथ ही महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक जुड़े रहे।