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डीह बाबा, बरगद के नीचे और स्कूलों में चल रही गांव की सरकार, पंचायत भवनों की बाट जोह रहे यूपी की हजारों ग्राम सभाएं
June 17, 2020 • जनसंदेश न्यूज • वाराणसी-चंदौली

सूबे में 18 हजार से अधिक गांवों में नहीं हैंं पंचायत भवन

ग्राम प्रधान या सचिव के घर पर ही रखे जा रहे हैं अभिलेख

वाराणसी में 148 गांव सभाओं में नहीं गांव पंचायत बिल्डिंग

जनपद में आठ बहुउद्देश्यीय भवन का कराया जा रहा निर्माण


सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। सूबे में हजारों गांवों की सरकारों के पास अपना कामकाज चलाने के लिए पंचायत भवन नहीं है। गांव के विकास की बात हो या विभिन्न स्तर पर होने वाली वहां की बैठकें, इसके लिए उन्हें किसी मंदिर परिसर, खुले में पेड़ के नीचे, किसी घर या किसी स्कूल प्रांगण का आसरा लेना पड़ रहा है। फलस्वरूप गांव पंचायतों के न तो अभिलेख सुरक्षित रखने की गारंटी रहती है और उससे जुड़े कार्य सही ढंग से हो पा रहे हैं। प्रायरू पंचायत सचिव भी ढूंढ़े नहीं मिलते।
गांवो को समृद्ध बनाने के लिए गठित की जाने वाली ग्राम पंचायतों का एक उद्देश्य यह भी है कि ग्राम प्रधान और सचिव एक स्थान पर मिल जाएं। ताकि ग्रामीणों को कहीं भटकना न पड़े। लेकिन ऐसे भी गांव हैं जहां वहां की सरकार तो मौजूद है लेकिन उसे संचालित करने के लिए पंचायत भवन नहीं हैं। इसका खामियाजा क्षेत्र के लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है। इस स्थिति में सर्वाधिक यह होती है तिक सक्रेटरी को ग्रामीण खोजते रह जाते हैं।
प्रदेश के लगभग 58 हजार 762 ग्राम पंचायतों में से करीब 18 हजार 576 में पंचायत भवन नहीं हैं। यह सरकारी आंकड़े ही चीख-चीखकर बता रहे हैं कि जहां पंचायत भवन नहीं हैं वहां की बैठकें भी सुव्यवस्थित ढंग से नहीं हो पा रही हैं। सिर्फ पूर्वांचल जनपदों पर नजर डालें तो वाराणसी में 148 पंचायत भवनों का टोटा है। इसी प्रकार गाजीपुर में सौ-दो सौ नहीं बल्कि 564 पंचायत भवन बने ही नहीं। यही हाल कुछ अन्य जिलों के भी हैं।
इनमें से जौनपुर में 601, प्रयागराज में 622, देवरिया में 513, गोरखपुर में 458 तथा आजमगढ़ में 651 पंचायत भवन नहीं हैं। वहीं, चंदौली में 241, संत रविदास नगर में 141, मऊ में 231, बलिया में 326, मीरजापुर में 54, सोनभद्र में 142, महाराजगंज में 159 और कुशीनगर में 106 पंचायत भवनों का अभाव है। हालांकि वर्तमान में कई ग्राम पंचायतें नगर निगम के दायरे में आ चुकी हैं। वर्तमान में बहुउद्देश्यीय पंचायत भवनों का प्रारूप है।


ऐसे बहुउद्देश्यीय पंचायत भवन में ग्राम पंचायत का दफ्तर, एक मीटिंग हॉल, पंचायत सचिव तथा अन्य कर्मचारियों के आवास, बरामदा, शौचालय आदि का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी कि पंचायत भवनों का निर्माण ग्राम पंचायत के जरिये कराया जाता है। फिलहाल प्रत्येक बहुउद्देश्यीय पंचायत भवन निर्माण के लिए लागत 17.46 लाख रुपये निर्धारित है। इसके अतिरिक्त भवन निर्माण में मनरेगा से 4.25 लाख रुपये का अंशदान किया जाता है।
वाराणसी में अभी चार विकास खंडों में आठ नये पंचायत भवन बनाए जा रहे हैं। उनमें सेवापुरी ब्लाक के अदमापुर, शंभूपुर, सुइलरा और जोगापुर तथा अराजी लाइन विकास खंड के बभनियांव एवं ढढोरपुर के अलावा काशी विद्यापीठ ब्लाक के नरउर और चोलापुर विकास खंड के पलकहां में बहुद्देश्यीय पंचायत भवन बनाए जा रहे हैं। एडीपीआरओ राकेश यादव के मुताबिक इन भवनों के लिए शासन ने धनराशि जारी कर दी है। प्रत्येक भवन 23झढ23 वर्ग मीटर में स्थापित होगा। इन भवनों को चार माह के भीतर तैयार कर लेने का लक्ष्य है।
दानगंज प्रतिनिधि के अनुसार चोलापुर ब्लाक के कुल 89 ग्राम सभाओं में से लगभग 55 में पंचायत भवन हैं। एडीओ पंचायत प्रमोद कुमार पाठक ने बताया कि पांच हजार की आबादी पर ही पंचायत भवन का निर्माण कराया जाता है।

भवन नदारद, बची सिर्फ ईंटें
जनसंदेश न्यूज
चांदमारी। हरहुआ ब्लाक के होलापुर, सुलेमापुर, बड़ा लालपुर, कानूडीह, पश्चिमपुर, जमुनीपुर, कुरौली, वाजिदपुर, अनौरा, नोनौटी, महदेपुर, गोसाईपुर, बहोरीपुर, पलिया शंभूपुर आदि में पंचायत भवन नहीं है। वहां की बैठकें कभी किसी डीह बाबा के निकट तो कभी किसी मंदिर परिसर भी करनी पड़ रही हैं। कई जगह तो स्कूल या घर पर अथवा खुले स्थान में बैठकें करनी पड़ रही हैं।
गांव में पंचायत भवन न होने से अभिलेखों का रखरखाव करना बड़ी चुनौती है। यह अभिलेख सचिव या ग्राम प्रधान अपने-अपने घर में संभाल रहे हैं, जहां पत्रावलियों के फटने या चूहे द्वारा कुतर लिए जाने का खतरा बना हुआ है। सुलेमापुर में पहले पंचायत भवन बना था लेकिन अब मौके पर कुछ ईंटें ही नजर आ रही  हैं। ग्राम प्रधान कन्हैया उर्फ मनोज यादव ने कहा कि प्रस्ताव भेजा गया है बजट आते ही काम चालू हो जाएगा। वहीं, ग्रामीणों के मुताबिक इस स्थल पर अवैध ढंग से कब्जा करने के लिए कई लोग जुटे हैं। जमुनीपुर प्रधान ने आरोप लगाया कि पंचायत भवन के लिए कई बार लगायी गयी गुहार नाकाम रही।

 

खत्म हो रहा कार्यकाल नहीं मिला भवन का पैसा
चिरईगांव। स्थानीय ब्लाक के 94 ग्राम पंचायतों में से अभी भी अंबा, लुठाकलां, कादीपुर खुर्द, गोबरहा, मढ़नी, शाहपुर, सिंहवार, गौरडीह रमगढ़वा, रजनहिया आदि ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का अभाव है। इन गावों की बैठकें प्राइमरी स्कूलों में छुट्टी के दिन करते हैं। कभी-कभी तो अवकाश का दिन न होने पर विद्यालय बंद होने का इंतजार करना पड़ता है। गौरडीह के ग्राम प्रधान अशोक यादव के अनुसार प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर में बैठकें करनी पड़ रही हैं। पंचायत भवन के लिए जमीन है लेकिन पैसा नहीं है। मढ़नी की प्रधान सुशीला देवी, गोबरहा के प्रधान भोलाराम, लुठाकलां के प्रधान मनोज यादव ने भी ऐसा ही बताया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि हमलोगों का पांच साल का कार्यकाल बीतने के करीब है उसके बावजूद पंचायत भवन के लिए धनराशि जरी नहीं हुई। एडीओ पंचायत सुनील कुमार सिंह के मुताबिक ग्राम पंचायतों को अधिकार है कि कार्ययोजना बनाकर 14वें राज्य वित्त की धनराशि से पंचायत भवन का निर्माण करा सकते हैं। जहां पंचायत भवन नहीं हैं वहां राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत पंचायत भवन ग्राम पंचायतों में निर्माण कराते हैं।