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चारागाह की जमीन पर मठ का कब्जा, उग्र हुए ग्रामीण, उम्भा जैसी घटना का बना माहौल
July 13, 2020 • संजय दूबे • जनसंदेश एक्सक्लूसिव

अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला हुआ शांत

मठ के द्वारा कागजों में हेरफेर करके कब्जा की गई है चारागाह की 668 बीघा जमीन

जनसंदेश न्यूज़
मीरजापुर। यह रसूख का मठ है, जहां नियम, कानून और संविधान सब आकर संन्यास धारण कर लेते है। कभी पशुओं के चारागाह के लिए छोड़ी गई जमीन को मठ के द्वारा कागजों में हेरफेर करते हुए अपने रसूख के बलबूते कब्जा कर लिया जाता है। मड़िहान तहसील क्षेत्र के कलवारी माफी गांव में स्थित एक मठ के द्वारा चारागाह की 668 बीघा जमीन पर अनाधिकार रूप से कब्जा करने के मामले में शनिवार को ग्रामीणों ने उग्र होकर प्रदर्शन किया था। 
मड़िहान तहसील क्षेत्र के कलवारी माफी गांव में स्थित एक मठ के द्वारा चारागाह की 668 बीघा 10 बिस्वा जमीन पर कागजों में हेरफेर करके अपने नाम कराकर कब्जा कर लिया गया था। मामले में अरसे से चली जांच के बाद भी जब कब्जा नही हटा तो ग्रामीणों का सब्र का बांध टूट गया, जहां जमीन को खाली कराने को लेकर शनिवार को ग्रामीणों ने उग्र होकर प्रदर्शन किया।

 
ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे लेकिन बाबा लोगों के द्वारा जमीन पर कब्जा नही होने देंगे। मड़िहान तहसील क्षेत्र के कलवारी माफी गांव में शनिवार को चारागाह की जमीन को एक मठ के अनुयाइयों के द्वारा जोतवाया जा रहा था, मामले की सूचना जैसे ही ग्रामीणों को मिली तो वो उग्र होकर मौके पर जाकर विरोध करने लगें। भीड़ आती देख खेत जुतवा रहे बाबा लोग फ़रार हो गए थे। मामले कि सूचना के बाद मौके की नजाकत को देखते हुए एसडीएम मड़िहान व सीओ मड़िहान सहित अन्य आलाधिकारी पहुंचे, जहां पर कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को समझाया, वहीं जमीन न कब्जा होने के आदेश के बाद ग्रामीण वापस लौटे। 

क्या है मामला
मड़िहान तहसील क्षेत्र के कलवारी माफी गांव में स्थित एक मठ के ऊपर 668 बीघा चारागाह की जमीन को हेरफेर करने का मामला 2008 में सामने आया था। मामले में जांच में यह तथ्य सामने आया कि सन 1988 में ही मठ के द्वारा चारागाह की जमीन को अपने नाम करा लिया गया था। तब यह क्षेत्र चुनार तहसील में हुआ करता था। 2008 में जब मामला उजागर हुआ, जहां पूरे मामले की जांच हुई। जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर फर्जीवाड़ा करके जमीन हेराफेरी करने के आरोप में तत्कालीन एसडीएम रहे एसके श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार राजगढ़ गिरधारी लाल व आश्रम से जुड़े विवेकानंद के ऊपर कूट रचित, धोखाधड़ी, लोक सम्पति निवारण अधिनियम में एसडीएम कैलाश सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। 

ग्रामीणों का आरोप
चारागाह की जमीन को अवमुक्त कराने कि मांग कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि जमीन कब्जा कर लिए जाने के बाद हमारे पशु कहा जाएंगे। हम लोग कई वर्षों से मांग कर रहे है लेकिन आजतक हमारी कभी नही सुनी गयी। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वो आते है और सीधे मठ में जाते है, फिर उनकी बोली बदल जाती है। ऐसे में हम लोगों को न्याय मिलने की कोई उम्मीद नही दिखाई पड़ रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यहां पर आंवला जैसे कई बेसकीमती पेड़ थे, जिसके कटवाकर मठ के द्वारा जमीन पर कब्जा कर लिया गया।

अवैध कब्जा के मामले में आश्रम से हुआ था रिकवरी
मड़िहान तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जा का कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले पटेहरा में स्थित एस एन फ्लेगस फाउंडेशन के द्वारा सैकड़ों बीघा सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया था। जिस मामले में तत्कालीन एसडीएम रहे विमल कुमार दूबे ने ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए कब्जा को हटवा दिया था, वहीं एक करोड़ एक लाख रुपये का जुर्माना भी वसूला था। सूत्रों कि माने तो एसडीएम द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ कार्यवाही के बाद एसडीएम का तबादला कर दिया गया। 

मठ को भी जारी हुआ था नोटिस
मठ के द्वारा चारागाह की जमीन पर कब्ज़ा के मामले में पिछले साल भी ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था, जहां पर तत्कालीन एसडीएम विमल कुमार दुबे ने मठ को नोटिस जारी कर दिया गया था। मामले में पिछले साल भी ग्रामीण प्रदर्शन किए थे, लेकिन कोई निष्कर्ष नही निकला। यह मामला हर वर्ष सामने आता है, लेकिन कुछ दिन बाद हाल वही का वहीं रह जाता है। इस वर्ष भी माहौल कुछ ऐसा ही बना हुआ है। पिछले वर्ष उम्भा में जमीन को लेकर विवाद हुआ था, जहां पर दर्जनों लोगों का जान चला गया था। 

यहीं से शुरू हुआ पटकथा
मामला 1988 का है, जहां पर वन विभाग जमीन व ग्रामसभा की 668 बीघा जमीन को चारागाह के नाम घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद जमीन को मठ ने अपने नाम करा लिया। मामले में जानकार बताते कि आश्रम की तरफ से यह तथ्य कोर्ट के सामने रखा गया कि यह जमीन पूर्व के समय में राजाओं ने हमें दान में दिया था, जहां अब गलती से चारागाह के नाम दर्ज हो गया है। इसी आधार पर जमीन मठ के ट्रस्ट खाते में दर्ज हो गई। मामले में कोर्ट ने अभी यथावत स्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया है।
इस संबंध में एसडीएम मड़िहान शिव प्रसाद ने कहा कि मामले में फ़ाइल काफी ज्यादा पन्ने का है। फिलहाल ग्रामीणों को समझा बुझाकर वापस भेज दिया गया है। इस पूरे में मामले जानकारी ली जा रही है, वहीं नियमानुसार कार्यवाही भी की जाएगी।