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बनारस में गांव जमीनों का सटीक नक्शा बनाने को हवाई सर्वे शुरु, इस उद्देश्य के तहत किया गया है पहल
July 11, 2020 • सुरोजीत चैटर्जी • वाराणसी-चंदौली

भूमि विवादों को कम करने, ग्राम पंचायतों का सटीक मानचित्र तैयार करने की पहल

- पायलट के तौर पर ड्रोन के माध्यम से सेवापुरी विकास खंड के पांच गांवों का सर्वेक्षण हुआ शुरु

- सही नक्शा तैयार होने पर कोई भी महकमा जरूरत के मुताबिक कर सकता है उसका उपयोग

- तय कार्यक्रम के अनुसार नक्शा बनाने के बाद ग्रामीणों से लेंगे आपत्तियां, फिर करेंगे निस्तारण

- भारत के छह लाख 62 हजार गांवों में यह सर्वे चार साल के भीतर पूर्ण करने का रखा है टार्गेट


सुरोजीत चैटर्जी
वाराणसी। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए शासन की नई ‘स्वामित्व योजना’ के अंतर्गत ड्रोन के जरिये जमीनों का नापजोख की मुहिम शनिवार को आरंभ कर दी गयी। इसके जरिये नये सिरे से गांवों का नक्शा और भूमि की सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। तय कार्यक्रम के अनुसार ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण कर खाका तैयार करने के बाद आपित्तियां लेंगे और अगले क्रम में उनका निस्तारण कर जमीनों के नक्शों को अंतिम स्वरूप दिया जाएगा।
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ‘स्वामित्व योजना’ के तहत ग्रामीण इलाकों की आबादी और जमीनों का आंकलन ड्रोन के जरिये हवाई सर्वेक्षण कर हासिल करेंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इसकी शुरुआत शनिवार को राजातालाब तहसील क्षेत्र के सेवापुरी विकास खंड के कुछ गांवों में पायटल के तौर पर हुई। ब्लाक के देवापुरकला, किन्नूपुर, भोरखुर्द और चक अटेसुआ आदि गांवों में यह सर्वे आरंभ किया गया। इसके लिए सर्वे ऑफ इंडिया और राजस्व विभाग की टीम लगायी गयी  है।
स्वामित्व योजना के मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की संपत्ति स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने पर उन्हें सरकारी लोन देने में सुविधा होगी। गांवों के बेहतर नियोजन के लिए भूमि का सटीक अभिलेख उपलब्ध रहेगा। संपत्तियों पर लगने वाले टैक्स तय करने में अशाुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। हवाई सर्वेक्षण के माध्यम से तैयार अभिलेख और जीआईएस नक्शा तैयार होने के बाद आवश्यकता के अनुसार कोई भी विभाग उन विवरणों को उपयोग कर सकेगा। इसके अलावा जीआईएस मानचित्रों का उपयोग कर बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायतें विकसित करना संभव होगा। वहीं, संपत्तियों को लेकर होने वाले विवादों में भी कमी आएगी।
इस स्कीम में देश के लगभग छह लाख 62 हजार गांवों को सम्मिलित करेंगे। स्वामित्व योजना को आगामी चार साल के भीतर पूरी तरह मूर्त रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के लगभग एक लाख गांवों में सर्वे को विस्तार देने समेत पंजाब और राजस्थान के लिए एक विशेष नेटवर्क स्थापित करने की तैयारी है।