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बड़ा फैसला: नहीं टूटेगी सदियों की परंपरा, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना आदेश, जगन्नाथ यात्रा की दी मंजूरी
June 22, 2020 • जनसंदेश न्यूज • देश-विदेश


जनसंदेश न्यूज़
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने अपने ही आदेश को पलटते हुए ऐतिहासिक जगन्नाथ यात्रा (Jagannath Yatra) की शर्तों के साथ अनुमति दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर रथयात्रा का आयोजन करवाने का निर्देश दिया। इस दौरान पूरी तरह से कोरोना (Corona) से बचाव की गाइडलाइन (Guideline) का पालन किया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय खंडपीठ में ने यह फैसला सुनाया। तीन सदस्यीय खंडपीठ में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल थे।
बता दें कि बीते 18 जून को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए रथयात्रा पर रोक लगा दी थी कि अगर मंजूरी दी तो भगवान जगन्नाथ माफ नहीं करेंगे। जिसके बाद केन्द्र ने रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था। जिसमें दलील दिया कि अगर इस साल रथ यात्रा नहीं निकलीं तो फिर 12 साल तक नहीं निकलेगी। क्योंकि रथयात्रा की यहीं परंपरा हैं। 
वर्चुअल सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रथयात्रा करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है। भगवान जगन्नाथ कल बाहर नहीं आ पाए तो फिर 12 साल तक नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि रथयात्रा की यही परंपरा है।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि एक दिन का कर्फ्यू लगाकर यात्रा निकाली जा सकती है। ओडिशा सरकार ने भी इसका समर्थन किया था कि कुछ शर्तों के साथ आयोजन हो सकता है। इस मामले में सरकार की याचिका से पहले भी 6 रिव्यू पिटीशन लग चुकी थीं।
पुरी के जिलाधीश बलवंत सिंह ने कहा है कि रथयात्रा को लेकर श्रीक्षेत्र धाम पूरी तरह से तैयार है। सुप्रीम कोर्ट को जो भी निर्देश का अनुपालन किया जाएगा। श्रीजगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक डा. किशन कुमार की अध्यक्षता में स्थानीय नीलाचल भक्त निवास में रथयात्रा को लेकर बैठक हुई। इस बैठक में जिलाधीश बलवंत सिंह, पुरी एसपी उमाशंकर दास के साथ शहर के तमाम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।