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अब इन विश्वविद्यालयों से संबंध डिग्री कालेज के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की होगी जांच
July 9, 2020 • अजय सिंह उर्फ राजू • इलाहाबाद

डीएम के आदेश पर जांच दल गठित

शिक्षकों के बाद प्रोफेसरों का होगा सत्यापन 

जनसंदेश न्यूज 
गाजीपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय एवं राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शासन के आदेश पर डीएम ने जिला कमेटी बनाई है। जिसमें सभी जांच अधिकारी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के अलावा पेन कार्ड सहित सभी बिन्दुओं पर अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके साथ ही स्थलीय जांच कमेटी के लिए दो जांच कमेटी भी बनाई गई है।
बतादें, पूर्वाचल विश्वविद्यालय से संबद्ध जिलें में आठ अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में 135 शिक्षक कार्यरत है। वहीं राज्‍‍‍य के विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन महाविद्यालयों में 38 शिक्षक कार्यरत है। इन महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के साथ पेन कार्ड, आधार कार्ड ,निवास सहित अन्य कागजातो की जांच कर सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 
शासन के आदेश पर जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने कमेटी बनाकर जांच टीम गठित कर दी है। कमेटी में एडीएम ,एएसपी तथा क्षेत्रिय उच्चशिक्षाधिकारी वाराणसी को सदस्य बनाया गया है। वहीं स्थलीय जांच के लिए दो जांच कमेटी बनाया गया है। जिसमें राज्य विश्वविद्यालय एवं राजकीय महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की जांच के लिए  एसडीएम, राजकीय महाविद्यालय से एक वरिष्ठ प्रवक्ता तथा पूर्वाचल विश्वविद्यालय वित्त अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। वहीं अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में एसडीएम , राजकीय महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता तथा शासन द्वारा नामित राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को सदस्य बनाया गया है। 
इधर डिग्री कालेज शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू होते ही विभाग में खलबली मच गई है। जांच कमेटी के अनुसार शिक्षकों की जांच एक हफ्ते में पूरी कर शासन को रिपोर्ट भेज दिया जाएगा। जांच में किसी शिक्षक का फर्जी दस्तावेज पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  दरअसल, कायमगंज जिले की सुप्रिया जाटव नाम की युवती अनामिका शुक्ला नाम से प्रदेश के 25 जिलों में बतौर शिक्षक तैनात थीं। इस फर्जीवाडेे का खुलासा होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। फर्जी शिक्षकों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच का आदेश दे दिया था।