ALL जनसंदेश एक्सक्लूसिव वाराणसी-चंदौली मीरजापुर-सोनभद्र-भदोही जौनपुर-गाजीपुर आजमगढ़-मऊ बलिया इलाहाबाद देश-विदेश करोना वायरस मनोरंजन/लाइफस्टाइल
आमजन में खराब हो रही बीएचयू की छवि, आखिर कौन है जिम्मेदार? छात्रों से लेकर दुकानदारों से बात, पढ़िए यह पड़ताल
July 19, 2020 • विजय कुमार सिंह • वाराणसी-चंदौली

अनुभवहीनता और गैर जिम्मेदाराना कार्य को जिम्मेदार बता रहे

सबसे खराब लोकप्रियता चिकित्सा अधीक्षक और रेक्टर की 

निदेशक आईएमएस के प्रति कम है रोष 

वीसी और रजिस्ट्रार को भी माना गया जिम्मेदार 



जनसंदेश न्यूज़
वाराणसी। बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान और सर सुंदरलाल अस्पताल को लेकर बीएचयू की खूब किरकिरी हो रही है। इस किरकिरी की वजह यहां के चिकित्सक बने हुए हैं। बताते चलें कि आए दिन आमजन सहित स्टूडेंट और अन्य लोगों के रोष का सामना करना पड़ रहा है। यह रोष इस कदर बढ़ा है कि बीएचयू का प्रोफेसर बताने पर एक प्रोफेसर को पुलिस की कड़ी टिप्पणी देखने को मिली थी। इस बात की जानकारी खुद प्रोफेसर ज्ञानेवश्वर चैबे ने इस बात की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ट्वीट करके बताई थी। 
अलोकप्रियता में सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो.एसके माथुर सबसे ऊपर हैं। दुसरे नंबर पर आलोचना झेलने वालों में बीएचयू रेक्टर और पूर्व आईएमएस डायरेक्टर प्रो. वीके शुक्ला का नाम शामिल है। इस कड़ी सर्वाधिक निचले स्थान पर चिक्त्सिा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आरके जैन का है। वैसे अलोकप्रियता की श्रेणी में सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सकों जेआर, एसआर और कंस्लटेंट ही केेंद्र में बताए गए। इस क्रम में बीएचयू वीसी प्रो.राकेश भटनागर का नाम निदेशक चिकित्सा विज्ञान संस्थान से उपर तीसरे स्थान पर है। 
महत्वपूर्ण है कि बीएचयू इमरजेंसी के की दुव्र्यवस्था के लिए उसके इंचार्ज डा. कुंदन कुमार की बजाए अधिकांश लोग चिकित्सा अधीक्षक सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो.एसके माथुर को ही जिम्मेदार मानते हैं। इसके लिए उनके चिकित्सकीय और प्रशासकीय अनुभव की कमी को कारण बताते हैं। महत्वपूर्ण है कि इस सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सकीय और प्रशासनिक पद चिकित्सा अधीक्षक के रूप मे प्रो.वीएन मिश्रा को कर्मठ बताया गया है। वहीं पूर्व एमएस रहे डा. ओपी उपाध्याय को श्रेष्ठ प्रशासनिक और चिकित्सकीय अनुभव वाला बताया गया है। वहीं ट्रामा सेंटर को सभी ने अराजक स्थिति वाला स्थान बताया है। 
उधर रजिस्ट्रार डा. नीरज त्रिपाठी को भी बीएचयू अस्पताल में व्याप्त दुव्र्यवस्था के लिए कुछ लोग जिम्मेदार मानते हैं। इस संबंध में हुई बातचीत में कुल 100 लोगों से बात की गयी। इसमें 10 दुकानदार, 10 छात्र, 10 शोधार्थी और 10 दुकानदार, 10 संविदा कर्मचारी, 10 चिकित्सक, 10 बीएचयू के शिक्षक, 10 कर्मचारी, 10 छात्राओं और शोधार्थी के साथ 10 पूर्व छात्रों पड़ताल में शामिल किया।