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आखिर पुलिस और बदमाशों में फर्क क्या है? मोदी की काशी में भाजपा महामंत्री के घर तांडव, जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं!
July 6, 2020 • विजय विनीत के साथ जीतेंद्र श्रीवास्तव • जनसंदेश एक्सक्लूसिव

भाजपा नेता सुरेंद्र के घर में जमकर तोड़-फोड़ ही नहीं, लूटपाट तक की गई

महिलाओं को मारा-पीटा गया, बूढ़ी मां को सड़क पर धकेलकर किया जख्मी

शराब के नशे में धुत लंका इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी ने गढ़ी थी फर्जी कहानी

विजय विनीत के साथ जीतेंद्र श्रीवास्तव
वाराणसी। पीएम नरेंद्र मोदी की काशी में तीन जुलाई की रात लंका थाने की पुलिस ने सुंदरपुर में भाजपा के जिला महामंत्री सुरेंद्र पटेल के घर में जमकर नंगा नाच किया। इसकी गवाह हैं वो तस्वीरें, जो भाजपा नेता के घर में तोड़-फोड़ और लूट-पाट को तस्दीक कर रही हैं। परिजनों की मानें तो शराब के नशे में धुत लंका इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी की अगुवाई में पुलिस ने नग्न तांडव किया। पुलिस ने वो सब कुछ किया जो आमतौर पर डकैत करते हैं। तस्वीरें गवाही दे रही हैं कि बनारस में अब पुलिस और बदमाशों में कोई फर्क नहीं है।
सुंदरपुर चौराहे पर मास्क न लगाए जाने के सवाल पर भाजपा महामंत्री सुरेंद्र पटेल के पुत्र विकास पटेल से पुलिस का विवाद हुआ। पुलिसिया लाठीचार्ज के बाद सुरेंद्र पटेल और उनके परिजनों को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले ने इसलिए तूल पकड़ा कि घटना के समय लंका इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी शराब के नशे में धुत थे। उनके चेहरे पर मास्क नहीं था। वर्दी भी ठीक नहीं थी और पैर लड़खड़ा रहे थे। शराब के नशे में उन्होंने एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी और पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रीति त्रिपाठी को झूठी सूचनाएं दीं। इसके बाद भारी पुलिस फोर्स भाजपा नेता के घर पहुंची।


दरअसल, झड़प और धक्का-मुक्की की रपट लिखने से ज्यादा जरूरी पुलिस अफसरों को यह लगा कि भाजपा महामंत्री सुरेंद्र पटेल को सबक सिखा दिया जाए। सुरेंद्र के पुत्र मयंक खुद मौके पर मौजूद थे। वो बताते हैं कि घटना की रात ग्यारह बजे करीब दो-ढाई सौ पुलिस के जवान और अधिकारी सुंदरपुर स्थित उनके आवास पर पहुंचे। पुलिस के जत्थे में महिला जवान नहीं थीं। पुलिस को देखते ही घर की महिलाएं सहम गईं। अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। बाद में उग्र पुलिसजनों ने हैंडपंप के हत्थे को निकालकर उससे पहले दरवाजा तोड़ा और घर में घुसकर बाद में बारी-बारी से अलमारियों को तोड़ना शुरू कर दिया और महंगे सामान लूट लिए। खाकी वर्दीधारियों ने शातिर डकैतों की तरह तोड़-फोड़ करने के साथ ही परिजनों से मारपीट की।
सुरेंद्र पटेल की बुजुर्ग मां श्रीमती मूर्ति देवी को भी जालिम पुलिस वालों ने नहीं बख्शा। उन्हें लाठियों से पीटा और बाद में धक्का दे दिया। इनके घुटने और कमर के पास काफी चोटें आर्इं हैं। घर में मौजूद सुरेंद्र के छोटे पुत्र मयंक पटेल को कुछ समझ में नहीं आया कि पुलिस आखिर क्यों उनके घर में तांडव मचा रही है? वजह पूछने पर पुलिस वालों ने उसपर भी थप्पड़ बरसाए। परिजनों के मुताबिक, अधिवक्ता वीरेंद्र पटेल की बेटी काजल पटेल (15 साल) ने भाई मयंक को बचाने की कोशिश की तो पुलिस वालों ने बाल पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया। सुंदरपुर चौकी इंचार्ज ने मयंक को लात-घूसों से बुरी तरह पीटा। इलाहाबाद में पढ़ने वाला मयंक कोरोना संकट में कालेज बंद होने के कारण घर आया हुआ है। उसकी मौसी स्मृति पटेल को भी पुलिस ने नहीं बख्शा। उन पर भी लात-घंूसे बरसाए गए।


परिजनों की मानें तो सुरेंद्र पटेल के घर की सभी अलमारियों को पुलिस वालों ने डकैतों की तरह तोड़ डाला और कीमती सामान लूट लिए। घर के फर्नीचर से लेकर वाश बेसिन तक को तोड़ डाला गया। मौके पर कोई पुलिस अफसर नहीं था। अगर कोई था तो नशे में धुत लंका थाना प्रभारी अश्वनी चतुर्वेदी और उसके साथ बड़ी संख्या में पुलिस के जवान।  
भाजपा नेता सुरेंद्र पटेल के मुताबिक, उनके मित्रों और शुभचिंतकों को पुलिस ने घर में घुसने नहीं दिया। कई लोगों को सड़क पर ही मारपीट कर भगा दिया गया। परिजनों ने पुलिसिया तांडव का वीडियो बनाने की कोशिश की तो पुलिस वालों ने मोबाइल भी तोड़ डाला। 
पुलिसिया तांडव सिर्फ सुरेंद्र पटेल के घर तक सीमित नहीं रहा। छात्र नेता विकास पटेल को खोजने के बहाने पुलिस मोहल्ले के कई घरों में जबरिया घुस गई। जिन लोगों ने एतराज जताया, उनके साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई।


सुरेंद्र का पुत्र मयंक बताता है कि नशे में धुत लंका थानाध्यक्ष नंगा नाच कराता रहा और पुलिस अफसरों को झूठी सूचनाएं देता रहा कि भाजपा नेता का समूचा परिवार अपराधियों का गिरोह है। घर में गोला-बारूद इकट्ठा कर रखा है। तब अफसरों ने पुलिस को तांडव करने की अनुमति दी। सुरेंद्र पटेल के घर में मारपीट और तोड़फोड़ का सिलसिला रात करीब चार बजे तक चला। इस बीच सुरेंद्र पटेल के समर्थक इलाकाई सीओ प्रीति त्रिपाठी के घर दुहाई देने पहुंचे तो उन्होंने लाठीचार्ज कराने की धमकी दे डाली। बाद में कुछ लोग एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी से मिले, लेकिन वे भी पुलिसिया रुआब में थे। पीड़ितों की कोई बात नहीं सुनी। अलबत्ता उन्होंने भाजपा नेता के परिवार को ही सबक सिखाने की धमकी तक दे डाली।
उधर मनबढ़ पुलिस वालों ने लंका थाने के लाकअप में मौजूद सुरेंद्र पटेल, भाई वीरेंद्र आदि के साथ थर्ड डिग्री इस्तेमाल किया। बाद में लंका पुलिस ने सड़क पर हुई झड़प के मामले में भाजपा नेताओं पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 323, 504, 506,341, 307, 392, 114, 188, 269, 270, 364, 353, 332, 333, 186 और 7-सीएलए एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। हालांकि जांच में अधिसंख्य धाराएं फर्जी पाई गईं और उन्हें खत्म कर दिया गया।


इस मामले में रविवार को लंका के इंस्पेक्टर अश्विनी चतुर्वेदी, सुंदरपुर चौकी प्रभारी सुनील गौड़ समेत दो पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं सीओ भेलूपुर प्रीति त्रिपाठी को एसएसपी कार्यालय से अटैच किया गया है। डीएम ने इस मामले में एडीएम फाइनेंस को मजिस्ट्रेटी जांच सौंपी है।
भाजपा नेता के भाई अधिवक्ता वीरेंद्र पटेल का आरोप है कि इस मामले के असली दोषी एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी हैं। उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इनका आरोप है कि एसपी सिटी विकास तिवारी और पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रीति त्रिपाठी ने ही इस मामले को हवा दी थी। इन अधिकारियों ने तांडव मचाने के लिए भारी पुलिस फोर्स भेजी थी। मामला गंभीर होने के बावजूद ये अफसर तत्काल खुद मौके पर नहीं पहुंचे। वीरेंद्र का कहना है कि उनके घर पर पुलिसिया तांडव सोची-समझी साजिश के तहत किया गया। उनके भाई सुरेंद्र पटेल की भाजपा में अच्छी इमेज है। इसी वजह से पार्टी ने उन्हें जिला महामंत्री का पद सौंप रखा है। सुरेंद्र जिला पंचायत सदस्य हैं। इनकी गिनती शांतप्रिय और धैर्यवान नेता के रूप में की जाती है।


 
भाजपा नेता के बेटे विकास को पहले सिपाहियों ने पीटा, तब हुई झड़प और हाथापाई

पुलिस ने सुनियोजित ढंग से की थी वारदात

वाराणसी। सुंदरपुर कांड इतना बड़ा नहीं था, लेकिन पुलिस की झूठी कहानी और तांडव ने उसे बड़ा कर दिया। घटना कुल इतनी थी कि सुंदरपुर चौकी प्रभारी सुनील गौड़ ने तीन जुलाई की रात करीब साढ़े नौ बजे भाजपा के जिला महामंत्री सुरेंद्र पटेल के पुत्र विकास पटेल को मिलने के लिए चौराहे पर बुलाया। चौकी इंचार्ज को किसी सरफराज नामक युवक की तलाश थी। विकास महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में छात्रसंघ का अध्यक्ष रह चुका है।
विकास चौका इंचार्ज से बातचीत कर रहा था। इसी बीच फैंटम दस्ते के दो जवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने विकास से मास्क न लगाने को लेकर पूछा। विकास का गुनाह इतना था कि उसने भी यह सवाल दाग दिया कि आप लोगों ने मास्क क्यों नहीं लगा रखा है? इतना कहना था कि फैंटम दस्ते के सिपाहियों ने विकास पटेल के साथ मारपीट शुरू कर दी। विकास ने परिजनों को सूचना दी तो वे भी वहां पहुंच गए। भाजपा महामंत्री सुरेंद्र पटेल मौके पर पहुंचे तो झड़प तेज हो गई। बाद में पुलिस ने तांडव किया और महिलाओं के साथ बदसलूकी भी। पुलिस ने फर्जी कहानी गढ़ी और मीडिया को गुमराह करने के लिए एकतरफा बयान व तस्वीरें वायरल कर दी गईं।


हमारी सरकार और हमीं पर जुल्म आखिर किसके यहां लगाएं गुहार?

वाराणसी। पुलिसिया जुल्म और ज्यादती के शिकार भाजपा महामंत्री सुरेंद्र पटेल इस बात से आहत हैं कि सरकार खुद उनकी पार्टी की है, लेकिन उनकी ही सुनवाई नहीं हुई। पुलिस अफसरों ने शराबी थानेदार की बात सच मान ली और पार्टी की इमेज का बंटाधार कर दिया।
सालों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। हर कोई उनके व्यवहार और जन-समर्थन से वाकिफ है, लेकिन किसी ने सच जानने की जरुरत नहीं समझी। पुलिस ने झूठी कहानी रची, फर्जी फोटोग्राफ वायरल की और सब के सब सच मान बैठे। आज तक किसी ने यह नहीं देखा कि उनके घर में घुसकर पुलिस ने किस तरह नंगा नाच किया है? ऐसे में आखिर किसके यहां गुहार लगाएं?
सुरेंद्र पटेल भाजपा के कद्दावर नेता हैं। ये जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्य भी हैं। इनके पास इलाके में खासा जनाधार है। सुरेंद्र पटेल उस वर्ग से आते हैं जिनकी तादात इतनी ज्यादा है कि जो कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायकी तय करती है। चाहे वो पिंडरा हो या फिर रोहनिया और सेवापुरी। पटेल समुदाय के समर्थन के बगैर बनारस में कोई भी पार्टी दमखम नहीं दिखा पाती है। सुरेंद्र पटेल के घर पुलिसिया तांडव के बाद कुर्मी समाज के लोग बेहद आहत हैं।  


सुरेंद्र पटेल खुद जन सरोकारी नेता हैं। इनकी ताकत को देखते हुए भाजपा ने इन्हें जिला महामंत्री का अहम पद दिया है। सुरेंद्र पटेल जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा की कमेटी में बड़े कद के पदाधिकारी हैं। पुलिस अफसरों ने न तो विश्वकर्मा की सुनी और न ही दूसरे नेताओं की। इस खेल में पुलिस के तीन अफसरों का एक गुट शामिल रहा,जिसने झूठी कहानी रची और खेल भी।
बनारस के भाजपा नेताओं के धैर्य का बांध तब टूट गया जब उन्हें यह पता चला कि पुलिस ने सुरेंद्र के घर में घुसकर तांडव मचाया और महिलाओं व बच्चों के साथ बदसलूकी की। लंका थाना पुलिस ने जब भाजपा जिला अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा और उनके समर्थकों की नहीं सुनी तो शनिवार की सुबह घटना की जानकारी क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव को दी। श्रीवास्तव ने प्रदेश के सहप्रभारी सुनील ओझा को पुलिस के कुकृत्य से अवगत कराया। साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल और काशी व गोरक्ष प्रान्त के संगठन महामंत्री रत्नाकर को दी।  
बाद में श्रीवास्तव ने शनिवार को सर्किट हाउस में आईजी विजय सिंह मीणा,जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा और एसएसपी प्रभाकर चौधरी को बुलाकर इस घटना पर नाराजगी व्यक्त की। इस मौके पर प्रदेश के सहप्रभारी सुनील ओझा भी मौजूद थे। बाद में पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा और फर्जी धाराएं हटानी पड़ी। इसके बाद भाजपा महामंत्री और उनके परिजनों की जमानत हो सकी।

 
मौके पर मौजूद लंका इंस्पेक्टर का हुलिया देख रह जाएंगे हैरान

चेहरे पर मास्क नहीं, उधड़ा रही थी वर्दी

वाराणसी। जिस मास्क को लेकर विवाद और झड़प हुई, उस कानून की धज्जियां सबसे ज्यादा पुलिस वालों ने ही उड़ाई। घटना के समय मौके पर मौजूद लंका इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेेदी का हुलिया देखिए। नशे में धुत इंस्पेक्टर की न वर्दी सही है, न चेहरे पर मास्क। कहानी गढ़ने में इतने माहिर कि इन्होंने सत्तारूढ़ दल भाजपा की साख ही गिरा दी। उस पार्टी और उस नेता की जो बनारस से समूचे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा नेता के घर लूटपाट और तोड़फोड़ करने वाले पुलिसजनों और जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ अब तक क्यों कार्रवाई नहीं की गई, यह सवाल अभी अनुत्तरित है?